अपर हेतु सुनु सैलकुमारी । कहउँ बिचित्र कथा बिस्तारी ॥
जेहि कारन अज अगुन अरूपा । ब्रह्म भयउ कोसलपुर-भूपा ॥
apara hetu sunu sailakumārī | kahaum̐ bicitra kathā bistārī ||
jehi kārana aja aguna arūpā | brahma bhayau kosalapura-bhūpā ||
5 श्लोक · 141 में से 361
शिवजी कहते हैं, हे शैलकुमारी, एक और कारण सुनो, मैं वह विचित्र कथा विस्तार से कहता हूँ, जिस कारण अजन्मा, निर्गुण और अरूप ब्रह्म कोसलपुर के राजा बने। जिन प्रभु को तुमने भाई के साथ मुनिवेष में वन में फिरते देखा था, जिनका चरित देखकर सती के शरीर में तुम बावली हो गई थीं, और जिसकी छाया अब भी तुम्हारे मन से नहीं मिटी, उन्हीं का भ्रमरूपी रोग हरने वाला चरित सुनो। उस अवतार में जो लीला की, वह सब अपनी बुद्धि के अनुसार कहूँगा। याज्ञवल्क्य कहते हैं, शंकर की वाणी सुनकर उमा सकुचाईं, प्रेम से भरीं और प्रसन्न हुईं। तब वृषकेतु वह कारण कहने लगे जिससे वह अवतार हुआ। हे मुनीश, मन लगाकर सुनो, रामकथा कलि के मल हरने वाली और मंगल करने वाली है।
अपर हेतु सुनु सैलकुमारी । कहउँ बिचित्र कथा बिस्तारी ॥
जेहि कारन अज अगुन अरूपा । ब्रह्म भयउ कोसलपुर-भूपा ॥
apara hetu sunu sailakumārī | kahaum̐ bicitra kathā bistārī ||
jehi kārana aja aguna arūpā | brahma bhayau kosalapura-bhūpā ||
जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा । बन्धु समेत धरें मुनि बेखा ॥
जासु चरित अवलोकि भवानी । सती सरीर रहिहु बौरानी ॥
jo prabhu bipina phirata tumha dekhā | bandhu sameta dhareṃ muni bekhā ||
jāsu carita avaloki bhavānī | satī sarīra rahihu baurānī ||
अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी । तासु चरित सुनु भ्रम-रुज-हारी ॥
लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा । सो सब कहिहउँ मति अनुसारा ॥
ajahum̐ na chāyā miṭati tumhārī | tāsu carita sunu bhrama-ruja-hārī ||
līlā kīnhi jo tehiṃ avatārā | so saba kahihaum̐ mati anusārā ||
भरद्वाज सुनि सङ्कर बानी । सकुचि सप्रेम उमा हरषानी ॥
लगे बहुरि बरनइ बृषकेतू । सो अवतार भयउ जेहि हेतू ॥
bharadvāja suni saṅkara bānī | sakuci saprema umā haraṣānī ||
lage bahuri baranai bṛṣaketū | so avatāra bhayau jehi hetū ||
सो मैँ तुम्ह सन कहउँ सब, सुनु मुनीस मन लाइ ।
राम कथा कलि मल हरनि, मङ्गल-करनि सुहाइ ॥
so maim̐ tumha sana kahaum̐ saba, sunu munīsa mana lāi |
rāma kathā kali mala harani, maṅgala-karani suhāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0