बालकाण्ड

अध्याय 139: शिवगणों के शाप का अनुग्रह

5 श्लोक · 139 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

शिवगणों के शाप का अनुग्रह

मुनि को मार्ग में जाते देखकर शिवजी के दोनों गण बहुत डरते हुए उनके पास आए और चरण पकड़कर दीन वचन बोले। हम ब्राह्मण नहीं, शिवगण हैं, हमने बड़ा अपराध किया और उसका फल पाया। हे कृपालु, शाप पर अनुग्रह कीजिए। दीनदयालु नारद बोले, तुम दोनों जाकर राक्षस बनो, तुम्हें बड़ा वैभव, तेज और बल मिले। जब तुम भुजबल से संसार को जीत लोगे, तब विष्णु मनुष्य का शरीर धारण करेंगे। युद्ध में हरि के हाथ मरकर तुम मुक्त हो जाओगे और फिर संसार में नहीं आओगे। दोनों मुनि के चरणों में सिर नवाकर चले और समय पाकर राक्षस हुए। इसी कारण एक कल्प में प्रभु ने मनुष्य अवतार लिया, पृथ्वी का भार हरने के लिए।

139.1

हर-गन मुनिहि जात पथ देखी । बिगत माह मन हरष बिसेखी ॥
अति सभीत नारद पहिँ आये । गहि-पद आरत बचन सुनाये ॥

hara-gana munihi jāta patha dekhī | bigata māha mana haraṣa bisekhī ||
ati sabhīta nārada pahim̐ āye | gahi-pada ārata bacana sunāye ||

139.2

हर-गन-हम न बिप्र मुनिराया । बड़ अपराध कीन्ह फल पाया ॥
साप-अनुग्रह करहु कृपाला । बोले नारद दीनदयाला ॥

hara-gana-hama na bipra munirāyā | bar̤a aparādha kīnha phala pāyā ||
sāpa-anugraha karahu kṛpālā | bole nārada dīnadayālā ||

139.3

निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ । बैभव बिपुल तेज बल होऊ ॥
भुज-बल बिस्व जितब तुम्ह जहिआ । धरिहहिँ बिष्नु मनुज तनु तहिआ ॥

nisicara jāi hohu tumha doū | baibhava bipula teja bala hoū ||
bhuja-bala bisva jitaba tumha jahiā | dharihahim̐ biṣnu manuja tanu tahiā ||

139.4

समर भरन हरि हाथ तुम्हारा । होइहहु मुकुत न पुनि संसारा ॥
चले जुगल मुनि-पद सिर नाई । भये निसाचर कालहि पाई ॥

samara bharana hari hātha tumhārā | hoihahu mukuta na puni saṃsārā ||
cale jugala muni-pada sira nāī | bhaye nisācara kālahi pāī ||

दो॰ 139दोहा

एक कलप एहि हेतु प्रभु, लीन्ह मनुज अवतार ।
सुर-रञ्जन सज्जन-सुखद, हरि भज्जन-भुबि-भार ॥

eka kalapa ehi hetu prabhu, līnha manuja avatāra |
sura-rañjana sajjana-sukhada, hari bhajjana-bhubi-bhāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0