जब हरि माया दूरि निवारी । नहिँ तहँ रमा न राजकुमारी ॥
तब मुनि अति सभीत हरि-चरना । गहे पाहि प्रनतारति हरना ॥
jaba hari māyā dūri nivārī | nahim̐ taham̐ ramā na rājakumārī ||
taba muni ati sabhīta hari-caranā | gahe pāhi pranatārati haranā ||
5 श्लोक · 138 में से 361
जब हरि ने माया हटा ली, तब वहाँ न लक्ष्मी थीं न राजकुमारी। तब मुनि ने अत्यन्त भयभीत होकर हरि के चरण पकड़ लिए और कहा, हे शरणागत के दुख हरने वाले, रक्षा कीजिए। हे कृपालु, मेरा शाप झूठा हो जाए। दीनदयालु ने कहा कि यह मेरी ही इच्छा थी। मुनि ने कहा, मैंने बहुत से कटु वचन कहे, मेरे पाप कैसे मिटेंगे? प्रभु बोले, जाकर शंकर के शतनाम का जप करो, हृदय को तुरन्त शान्ति मिलेगी। शिव के समान मुझे कोई प्रिय नहीं, यह विश्वास भूलकर भी मत छोड़ना। जिस पर त्रिपुरारि कृपा नहीं करते, वह मेरी भक्ति नहीं पाता। यह हृदय में रखकर पृथ्वी पर विचरो, अब माया तुम्हारे पास नहीं आएगी। बहुत प्रकार समझाकर प्रभु अन्तर्धान हुए और नारद राम के गुण गाते सत्यलोक चले।
जब हरि माया दूरि निवारी । नहिँ तहँ रमा न राजकुमारी ॥
तब मुनि अति सभीत हरि-चरना । गहे पाहि प्रनतारति हरना ॥
jaba hari māyā dūri nivārī | nahim̐ taham̐ ramā na rājakumārī ||
taba muni ati sabhīta hari-caranā | gahe pāhi pranatārati haranā ||
मृषा होउ मम साप कृपाला । मम इच्छा कह दीनदयाला ॥
मैँ दुर्बचन कहे बहुतेरे । कह मुनि पाप मिटिहिं किमि मेरे ॥
mṛṣā hou mama sāpa kṛpālā | mama icchā kaha dīnadayālā ||
maim̐ durbacana kahe bahutere | kaha muni pāpa miṭihiṃ kimi mere ||
जपहु जाइ सङ्कर सत-नामा । होइहि हृदयँ तुरन्त बिस्रामा ॥
कोउ नहिँ सिव समान प्रिय मोरें । असि परतीति तजहु जनि भोरें ॥
japahu jāi saṅkara sata-nāmā | hoihi hṛdayam̐ turanta bisrāmā ||
kou nahim̐ siva samāna priya moreṃ | asi paratīti tajahu jani bhoreṃ ||
जेहि पर कृपा न करहिँ पुरारी । सो न पाव मुनि भगति हमारी ॥
अस उर धरि महि बिचरहु जाई । अब न तुम्हहिँ माया निअराई ॥
jehi para kṛpā na karahim̐ purārī | so na pāva muni bhagati hamārī ||
asa ura dhari mahi bicarahu jāī | aba na tumhahim̐ māyā niarāī ||
बहु बिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु, तब भये अन्तरधान ।
सत्यलोक नारद चले, करत राम-गुन-गान ॥
bahu bidhi munihi prabodhi prabhu, taba bhaye antaradhāna |
satyaloka nārada cale, karata rāma-guna-gāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0