बालकाण्ड

अध्याय 137: नारद का प्रभु को शाप

5 श्लोक · 137 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

नारद का प्रभु को शाप

नारद आगे कहते हैं, आप परम स्वतन्त्र हैं, सिर पर कोई नहीं, जो मन को भाता है वही करते हैं। भले को बुरा और बुरे को भला कर देते हैं,। सबको ठग ठगकर परच गए हैं, शुभ अशुभ कर्म आपको बाधा नहीं देते, अब तक किसी ने आपको सीधा नहीं किया। अब अच्छे घर बायना दिया है, अपना किया फल पाओगे। जिस देह को धरकर मुझे ठगा, वही देह धारण करो, यह मेरा शाप है। मेरा रूप बन्दर का बनाया, इसलिए बन्दर ही तुम्हारी सहायता करेंगे। तुमने मेरा बड़ा अपकार किया, इसलिए तुम स्त्री के विरह में दुखी होगे। प्रभु ने प्रसन्न हृदय से शाप सिर पर धरा, बहुत विनती की, और तब कृपानिधि ने अपनी माया की प्रबलता खींच ली।

137.1

परम स्वतन्त्र न सिर पर कोई । भावइ मनहिँ करहु तुम्ह सोई ॥
भलेहि मन्द मन्देहि भल करहू । बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू ॥

parama svatantra na sira para koī | bhāvai manahim̐ karahu tumha soī ||
bhalehi manda mandehi bhala karahū | bisamaya haraṣa na hiyam̐ kachu dharahū ||

137.2

डहकि डहकि परिचेहु सब काहू । अति असङ्क मन सदा उछाहू ॥
करम सुभासुभ तुम्हहिँ न बाधा । अब लगि तुम्हहिँ न काहूँ साधा ॥

ḍahaki ḍahaki paricehu saba kāhū | ati asaṅka mana sadā uchāhū ||
karama subhāsubha tumhahim̐ na bādhā | aba lagi tumhahim̐ na kāhūm̐ sādhā ||

137.3

भले भवन अब बायन दीन्हा । पाबहुगे फल आपन कीन्हा ॥
बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा । सोइ तनु धरहु साप मम एहा ॥

bhale bhavana aba bāyana dīnhā | pābahuge phala āpana kīnhā ||
baṃcehu mohi javani dhari dehā | soi tanu dharahu sāpa mama ehā ||

137.4

कपि आकृति तुम्ह कीन्हि हमारी । करिहहिँ कीस सहाय तुम्हारी ॥
मम अपकार कीन्ही तुम्ह भारी । नारि-बिरहँ तुम्ह होब दुखारी ॥

kapi ākṛti tumha kīnhi hamārī | karihahim̐ kīsa sahāya tumhārī ||
mama apakāra kīnhī tumha bhārī | nāri-biraham̐ tumha hoba dukhārī ||

दो॰ 137दोहा

साप सीस धरि हरषि हियँ, प्रभु बहु बिनती कीन्ह ।
निज-माया के प्रबलता, करषि कृपानिधि लीन्ह ॥

sāpa sīsa dhari haraṣi hiyam̐, prabhu bahu binatī kīnha |
nija-māyā ke prabalatā, karaṣi kṛpānidhi līnha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0