बालकाण्ड

अध्याय 135: शिवगणों को नारद का शाप

5 श्लोक · 135 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

शिवगणों को नारद का शाप

जिस ओर नारद फूले बैठे थे, उस दिशा में राजकुमारी ने भूलकर भी नहीं देखा। मुनि बार बार उचकते और अकुलाते थे, उनकी दशा देखकर शिवगण मुस्कुराते थे। कृपालु भगवान राजा का शरीर धरकर वहाँ आए और कुमारी ने प्रसन्न होकर उन्हें जयमाला पहना दी। लक्ष्मीनिवास दुलहिन को ले गए। मुनि अत्यन्त व्याकुल हुए, मानो गाँठ से छूटकर मणि गिर गई हो। तब शिवगणों ने मुस्कुराकर कहा कि जाकर दर्पण में अपना मुख देखो, और ऐसा कहकर दोनों बहुत डरकर भागे। मुनि ने जल में झाँककर अपना मुख देखा और वह रूप देखकर उनका क्रोध बहुत बढ़ गया। उन्होंने कठोर शाप दिया कि तुम दोनों कपटी पापी जाकर राक्षस हो जाओ, तुमने हमारी हँसी उड़ाई, उसका फल लो, फिर किसी मुनि पर हँसना।

135.1

जेहि दिसि बैठे नारद फूली । सो दिसि देहि न बिलोकी भूली ॥
पुनि पुनि मुनि उकसहिँ अकुलाहीँ । देखि दसा हर-गन मुसुकाहीँ ॥

jehi disi baiṭhe nārada phūlī | so disi dehi na bilokī bhūlī ||
puni puni muni ukasahim̐ akulāhīm̐ | dekhi dasā hara-gana musukāhīm̐ ||

135.2

धरि नृप तनु तहँ गयउ कृपाला । कुँअरि हरषि मेलेउ जयमाला ॥
दुलहिनि लेइ गये लच्छिनिवासा । नृप-समाज सब भयउ निरासा ॥

dhari nṛpa tanu taham̐ gayau kṛpālā | kum̐ari haraṣi meleu jayamālā ||
dulahini lei gaye lacchinivāsā | nṛpa-samāja saba bhayau nirāsā ||

135.3

मुनि अति बिकल माह मति नाठी । मनि गिरि गई छूटि जनु गाँठी ॥
तब हर-गन बोले मुसुकाई । निज मुख मुकुर बिलोकहु जाई ॥

muni ati bikala māha mati nāṭhī | mani giri gaī chūṭi janu gām̐ṭhī ||
taba hara-gana bole musukāī | nija mukha mukura bilokahu jāī ||

135.4

अस कहि दोउ भागे भयं भारी । बदन दीख मुनि बारि निहारी ॥
बेष बिलोकि क्रोध अति बाढ़ा । तिन्हहिँ सराप दीन्ह अति गाढ़ा ॥

asa kahi dou bhāge bhayaṃ bhārī | badana dīkha muni bāri nihārī ||
beṣa biloki krodha ati bār̤hā | tinhahim̐ sarāpa dīnha ati gār̤hā ||

दो॰ 135दोहा

होहु निसाचर जाइ तुम्ह, कपटी पापी दोउ ।
हँसेहु हमहिँ सो लेहु फल, बहुरि हँसेहु मुनि कोउ ॥

hohu nisācara jāi tumha, kapaṭī pāpī dou |
ham̐sehu hamahim̐ so lehu phala, bahuri ham̐sehu muni kou ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0