बालकाण्ड

अध्याय 132: हरि से सुन्दरता की याचना

5 श्लोक · 132 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

हरि से सुन्दरता की याचना

नारद ने सोचा कि हरि से सुन्दरता माँगूँ, मेरा हित करने वाला हरि के समान कोई नहीं, इस समय वही सहायक हों। उन्होंने उसी समय बहुत प्रकार से विनती की, और कौतुकी कृपालु प्रभु प्रकट हो गए। प्रभु को देखकर मुनि के नेत्र शीतल हुए। अत्यन्त आर्त होकर उन्होंने सारी कथा सुनाई और कहा कि कृपा करके सहायक बनिए, हे प्रभु, मुझे अपना रूप दीजिए, और किसी प्रकार मैं उसे नहीं पा सकता। हे नाथ, जिस विधि मेरा हित हो, वही शीघ्र कीजिए, मैं आपका दास हूँ। अपनी माया का विशाल बल देखकर दीनदयालु मन में हँसे और बोले कि नारद, जिस विधि तुम्हारा परम हित होगा, हम वही करेंगे, और कुछ नहीं, हमारा वचन झूठा नहीं होता।

132.1

हरि सन माँगउँ सुन्दरताई । होइहि जात गहरु अति भाई ॥
मोरें हित हरि सम नहिँ कोऊ । एहि अवसर सहाय सोइ होऊ ॥

hari sana mām̐gaum̐ sundaratāī | hoihi jāta gaharu ati bhāī ||
moreṃ hita hari sama nahim̐ koū | ehi avasara sahāya soi hoū ||

132.2

बहु बिधि बिनय कीन्ह तेहि काला । प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला ॥
प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने । होइहि काज हिये हरषाने ॥

bahu bidhi binaya kīnha tehi kālā | pragaṭeu prabhu kautukī kṛpālā ||
prabhu biloki muni nayana jur̤āne | hoihi kāja hiye haraṣāne ||

132.3

अति आरति कहि कथा सुनाई । करहु कृपा करि होहु सहाई ॥
आपन रूप देहु प्रभु मोही । आन भाँति नहिँ पावउँ ओही ॥

ati ārati kahi kathā sunāī | karahu kṛpā kari hohu sahāī ||
āpana rūpa dehu prabhu mohī | āna bhām̐ti nahim̐ pāvaum̐ ohī ||

132.4

जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा । करहु से बेगि दास मैँ तोरा ॥
निज-माया बल देखि बिसाला । हियँ हँसि बोले दीनदयाला ॥

jehi bidhi nātha hoi hita morā | karahu se begi dāsa maim̐ torā ||
nija-māyā bala dekhi bisālā | hiyam̐ ham̐si bole dīnadayālā ||

दो॰ 132दोहा

जेहि बिधि होइहि परम हित, नारद सुनहु तुम्हार ।
सोइ हम करब न आन कछु, बचन न मृषा हमार ॥

jehi bidhi hoihi parama hita, nārada sunahu tumhāra |
soi hama karaba na āna kachu, bacana na mṛṣā hamāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0