बालकाण्ड

अध्याय 121: श्रीराम के अवतार का कारण

5 श्लोक · 121 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम के अवतार का कारण

शिवजी पार्वती के प्रश्न का उत्तर आरम्भ करते हैं। हरि के चरित अनेक और निर्मल हैं, वेद और आगम उन्हें गाते हैं, फिर भी कोई ठीक ठीक नहीं कह सकता कि प्रभु इसी कारण से अवतार लेते हैं। श्रीराम बुद्धि, मन और वाणी से परे हैं, यह शिवजी का अपना मत है। तब भी सन्त, मुनि, वेद और पुराण अपनी अपनी समझ से जैसा कहते हैं, वैसा ही वे सुनाएँगे। जब जब धर्म की हानि होती है और अधम, अभिमानी असुर बढ़ते हैं, जब ब्राह्मण, गौ, देवता और पृथ्वी अन्याय से दुखी होते हैं, तब तब कृपानिधि प्रभु शरीर धारण करते हैं। वे असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, वेद की मर्यादा की रक्षा करते हैं और जगत में अपना निर्मल यश फैलाते हैं।

121.1

सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाये । बिपुल बिसद निगमागम गाये ॥
हरि अवतार हेतु जेहि होई । इदमित्थं कहि जाइ न सोई ॥

sunu girijā haricarita suhāye | bipula bisada nigamāgama gāye ||
hari avatāra hetu jehi hoī | idamitthaṃ kahi jāi na soī ||

121.2

राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी । मत हमार अस सुनहिँ सयानी ॥
तदपि सन्त मुनि बेद पुराना । जस कछु कहहिँ स्वमति अनुमाना ॥

rāma atarkya buddhi mana bānī | mata hamāra asa sunahim̐ sayānī ||
tadapi santa muni beda purānā | jasa kachu kahahim̐ svamati anumānā ||

121.3

तस मैँ सुमुखि सुनावउँ तोही । समुझि परइ जस कारन मोही ॥
जब जब होइ धरम कै हानी । बाढ़इ असुर अधम अभिमानी ॥

tasa maim̐ sumukhi sunāvaum̐ tohī | samujhi parai jasa kārana mohī ||
jaba jaba hoi dharama kai hānī | bār̤hai asura adhama abhimānī ||

121.4

करहिँ अनीति जाइ नहिँ बरनी । सीदहिँ बिप्र-धेनु-सुर-धरनी ॥
तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा । हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा ॥

karahim̐ anīti jāi nahim̐ baranī | sīdahim̐ bipra-dhenu-sura-dharanī ||
taba taba prabhu dhari bibidha sarīrā | harahiṃ kṛpānidhi sajjana pīrā ||

दो॰ 121दोहा

असुर मारि थापहिँ सुरन्ह, राखहिँ निज-श्रुति-सेतु ।
जग बिस्तारहिँ बिसद जस, राम-जनम कर हेतु ॥

asura māri thāpahim̐ suranha, rākhahim̐ nija-śruti-setu |
jaga bistārahim̐ bisada jasa, rāma-janama kara hetu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0