जे जनमे कलिकाल कराला । करतब बायस बेष मराला ॥
चलत कुपन्थ बेद-मग छाँड़े । कपट-कलेवर कलि मल भाँड़ें ॥
je janame kalikāla karālā | karataba bāyasa beṣa marālā ||
calata kupantha beda-maga chām̐r̤e | kapaṭa-kalevara kali mala bhām̐r̤eṃ ||
7 श्लोक · 12 में से 361
तुलसीदास अपनी ओर देखते हैं। कठोर कलियुग में जन्मे लोग हंस का वेश धरकर कौए जैसे काम करते हैं, वेद का मार्ग छोड़ते हैं और स्वयं को राम का भक्त कहकर धन, क्रोध और काम की सेवा करते हैं। धर्म का झंडा उठाने वाले ऐसे दम्भियों में कवि अपना नाम पहले रखते हैं। सब अवगुण कहें तो कथा का अन्त न हो, इसलिए थोड़ा कहते हैं। इस विनती के बाद कोई कथा को दोष न देगा, और जो फिर भी शंका करे वह उनसे अधिक जड़ है। वे कवि नहीं, बुद्धि भर राम के गुण गाते हैं। मेरु उड़ाने वाली हवा के आगे रुई क्या है? शारदा, शेष, महेश, ब्रह्मा और वेद भी नेति नेति ही कहते हैं।
जे जनमे कलिकाल कराला । करतब बायस बेष मराला ॥
चलत कुपन्थ बेद-मग छाँड़े । कपट-कलेवर कलि मल भाँड़ें ॥
je janame kalikāla karālā | karataba bāyasa beṣa marālā ||
calata kupantha beda-maga chām̐r̤e | kapaṭa-kalevara kali mala bhām̐r̤eṃ ||
बञ्चक भगत कहाइ राम के । किङ्कर कञ्चन कोह-काम के ॥
तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी । धींग धरमध्वज धन्धक धोरी ॥
bañcaka bhagata kahāi rāma ke | kiṅkara kañcana koha-kāma ke ||
tinha maham̐ prathama rekha jaga morī | dhīṃga dharamadhvaja dhandhaka dhorī ||
जौं अपने अवगुन सब कहऊँ । बाढ़इ कथा पार नहिँ लहऊँ ॥
तातेँ मैं अति अलप बखाने । थोरे महँ जानिहहिँ सयाने ॥
jauṃ apane avaguna saba kahaūm̐ | bār̤hai kathā pāra nahim̐ lahaūm̐ ||
tātem̐ maiṃ ati alapa bakhāne | thore maham̐ jānihahim̐ sayāne ||
समुझि बिबिध बिधि बिनती मोरी । कोउ न कथा सुनि देइहि खोरी ॥
एतेहु पर करिहहिं जे असङ्का । मोहि ते अधिक ते जड़ मति-रङ्का ॥
samujhi bibidha bidhi binatī morī | kou na kathā suni deihi khorī ||
etehu para karihahiṃ je asaṅkā | mohi te adhika te jar̤a mati-raṅkā ||
कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ । मति अनुरूप राम-गुन गावउँ ॥
कहँ रघुपति के चरित अपारा । कहँ मति मोरि निरत संसारा ॥
kabi na houm̐ nahiṃ catura kahāvaum̐ | mati anurūpa rāma-guna gāvaum̐ ||
kaham̐ raghupati ke carita apārā | kaham̐ mati mori nirata saṃsārā ||
जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीँ । कहहु तूल केहि लेखे माहीं ॥
समुझत अमित राम प्रभुताई । करत कथा मन अति कदराई ॥
jehiṃ māruta giri meru ur̤āhīm̐ | kahahu tūla kehi lekhe māhīṃ ||
samujhata amita rāma prabhutāī | karata kathā mana ati kadarāī ||
सारद सेष महेस बिधि, आगम निगम पुरान ।
नेति नेति कहि जासु गुन, करहिं निरन्तर गान ॥
sārada seṣa mahesa bidhi, āgama nigama purāna |
neti neti kahi jāsu guna, karahiṃ nirantara gāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0