अयोध्याकाण्ड

अध्याय 94: भोर में जटा बँधी और सुमन्त्र की विनती

5 श्लोक · 94 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भोर में जटा बँधी और सुमन्त्र की विनती

लक्ष्मण कहते हैं, हे सखा, मोह छोड़कर सीता रघुवीर के चरणों में रत हो जाओ। राम के गुण कहते कहते सबेरा हुआ और प्रभु जागे। स्नान करके श्रीराम ने बरगद का दूध मँगाया और भाई सहित सिर पर जटाएँ बनाईं। यह देखकर सुमन्त्र की आँखें भर आईं, हृदय जलने लगा और मुख मलिन हो गया। हाथ जोड़कर वह दीन वचन बोला, हे नाथ, कोसलनाथ ने कहा था कि रथ लेकर राम के साथ जाओ, वन दिखाकर और गंगा स्नान कराकर दोनों भाइयों को शीघ्र लौटा लाना, सब संशय और संकोच मिटाकर लक्ष्मण, राम और सीता को फेर लाना। हे स्वामी, जैसा कहें वही करूँ। यह कहकर वह चरणों में गिरा और बालक की तरह रो पड़ा।

94.1

सखा समुझि अस परिहरि मोहु । सिय-रघुबीर-चरन-रत होहू ॥
कहत राम-गुन भा भिनुसारा । जागे जग मङ्गल-सुख दारा ॥

sakhā samujhi asa parihari mohu | siya-raghubīra-carana-rata hohū ||
kahata rāma-guna bhā bhinusārā | jāge jaga maṅgala-sukha dārā ||

94.2

सकल सोच करि राम नहावा । सुचि सुजान बट-छीर मगावा ॥
अनुज सहित सिर जटा बनाये । देखि सुमन्त्र नयन-जल छाये ॥

sakala soca kari rāma nahāvā | suci sujāna baṭa-chīra magāvā ||
anuja sahita sira jaṭā banāye | dekhi sumantra nayana-jala chāye ||

94.3

हृदयँ दाह अति बदन मलीना । कह कर जोरि बचन अति दीना ॥
नाथ कहेउ अस कोसलनाथा । लै रथ जाहु राम कें साथा ॥

hṛdayam̐ dāha ati badana malīnā | kaha kara jori bacana ati dīnā ||
nātha kaheu asa kosalanāthā | lai ratha jāhu rāma keṃ sāthā ||

94.4

बन देखाइ सुरसरि अन्हवाई । आनेहु फेरि बेगि दोउ भाई ॥
लखन-राम-सिय आनेहु फेरी । संसय सकल सकोच निबेरी ॥

bana dekhāi surasari anhavāī | ānehu pheri begi dou bhāī ||
lakhana-rāma-siya ānehu pherī | saṃsaya sakala sakoca niberī ||

दो॰ 94दोहा

नृप अस कहेउ गोसाईं जस, कहिय करउँ बलि सोइ ।
करि बिनती पायन्ह परेउ, दीन्ह बाल जिमि रोइ ॥

nṛpa asa kaheu gosāīṃ jasa, kahiya karaum̐ bali soi |
kari binatī pāyanha pareu, dīnha bāla jimi roi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0