अयोध्याकाण्ड

अध्याय 93: मोह की रात से जागकर रामचरणों में प्रेम

5 श्लोक · 93 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

मोह की रात से जागकर रामचरणों में प्रेम

लक्ष्मण आगे कहते हैं, ऐसा विचार कर क्रोध मत करो और किसी को व्यर्थ दोष मत दो। मोह की रात में सब सोते हैं और अनेक सपने देखते हैं। इस जगत रूपी रात में परमार्थ के खोजी, प्रपंच से अलग योगी ही जागते हैं। जीव तभी जागा जानो जब उसे सब विषय विलासों से वैराग्य हो जाए, तब विवेक होता है, मोह भागता है और रघुनाथ के चरणों में अनुराग होता है। हे सखा, मन, कर्म और वचन से रामचरणों में प्रेम ही परम परमार्थ है। राम ब्रह्म हैं, अव्यक्त, अलख, अनादि, सब विकारों से रहित, जिन्हें वेद नेति नेति कहते हैं। वही भक्त, भूमि, ब्राह्मण, गौ और देवताओं के हित मनुष्य शरीर धरते हैं, जिनके चरित सुनने से जगत का जाल मिट जाता है।

93.1

अस बिचारि नहिं कीजिय रोसू । काहुहि बादि न देइअ दोषू ॥
मोह-निसाँ सब सोवनिहारा । देखिय सपन अनेक प्रकारा ॥

asa bicāri nahiṃ kījiya rosū | kāhuhi bādi na deia doṣū ||
moha-nisām̐ saba sovanihārā | dekhiya sapana aneka prakārā ||

93.2

एहिं जग-जामिनि जागहिं जोगी । परमारथी प्रपञ्च बियोगी ॥
जानिय तबहिँ जीव जग जागा । जब सब बिषय-बिलास बिरागा ॥

ehiṃ jaga-jāmini jāgahiṃ jogī | paramārathī prapañca biyogī ||
jāniya tabahim̐ jīva jaga jāgā | jaba saba biṣaya-bilāsa birāgā ||

93.3

होइ बिबेक मोह भ्रम भागा । तब रघुनाथ चरन अनुरागा ॥
सखा परम परमारथ एहू । मन क्रम बचन राम-पद नेहू ॥

hoi bibeka moha bhrama bhāgā | taba raghunātha carana anurāgā ||
sakhā parama paramāratha ehū | mana krama bacana rāma-pada nehū ||

93.4

राम ब्रह्म परमारथ रूपा । अबिगत अलख अनादि अनूपा ॥
सकल बिकार रहित गत भेदा । कहि नित नेति निरूपहिँ बेदा ॥

rāma brahma paramāratha rūpā | abigata alakha anādi anūpā ||
sakala bikāra rahita gata bhedā | kahi nita neti nirūpahim̐ bedā ||

दो॰ 93दोहा

भगत भूमि भूसुर सुरभि, सुर हित लागि कृपाल ।
करत चरित धरि मनुज तनु, सुनत मिटहि जग जाल ॥

bhagata bhūmi bhūsura surabhi, sura hita lāgi kṛpāla |
karata carita dhari manuja tanu, sunata miṭahi jaga jāla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0