अयोध्याकाण्ड

अध्याय 86: जागने पर श्रीराम को न पाकर प्रजा का विलाप

5 श्लोक · 86 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

जागने पर श्रीराम को न पाकर प्रजा का विलाप

भोर होने पर लोग जागे और जाना कि रघुनाथ चले गए, तो बड़ा कोलाहल मच गया। रथ की खोज कहीं नहीं मिली, वे राम राम पुकारते चारों ओर दौड़े, जैसे समुद्र में जहाज डूबने पर व्यापारी व्याकुल हों। कहते हैं कि हमारे कष्ट के कारण राम ने हमें छोड़ा। वे अपनी निन्दा करते हैं और मछली को सराहते हैं जो जल से बिछुड़ते ही मर जाती है; रघुवीर के बिना जीवन को धिक्कार है। यदि विधाता ने प्रिय का वियोग दिया तो माँगने पर मृत्यु क्यों न दी। विलाप करते वे अवध लौटे। केवल अवधि की आशा उनके प्राण रखे हुए है। नर नारी राम दर्शन के लिए नियम और व्रत करने लगे, जैसे सूर्य के बिना चकवा चकवी और कमल दीन हो जाते हैं।

86.1

जागे सकल लोग भएँ भोरू । गे रघुनाथ भयउ अति सोरू ॥
रथ कर खोज कतहहुँ नहिँ पावहिँ । राम राम कहि चहु दिसि धावहिं ॥

jāge sakala loga bhaem̐ bhorū | ge raghunātha bhayau ati sorū ||
ratha kara khoja katahahum̐ nahim̐ pāvahim̐ | rāma rāma kahi cahu disi dhāvahiṃ ||

86.2

मनहुँ बारिनिधि बूड़ जहाजू । भयउ बिकल बड़ बनिक-समाजू ॥
एकहि एक देहि उपदेसू । तजे राम हम जानि कलेसू ॥

manahum̐ bārinidhi būr̤a jahājū | bhayau bikala bar̤a banika-samājū ||
ekahi eka dehi upadesū | taje rāma hama jāni kalesū ||

86.3

निन्दहिँ आपु सराहहिँ मीना । धिग जीवन रघुबीर बिहीना ॥
जौं पै प्रिय बियोग बिधि कीन्हा । तो कस मरन न मागें दीन्हा ॥

nindahim̐ āpu sarāhahim̐ mīnā | dhiga jīvana raghubīra bihīnā ||
jauṃ pai priya biyoga bidhi kīnhā | to kasa marana na māgeṃ dīnhā ||

86.4

एहि बिधि करत प्रलाप-कलापा । आये अवध भरे परितापा ॥
विषम बियोग न जाइ बखाना । अवधि आस सब राखहिँ प्राना ॥

ehi bidhi karata pralāpa-kalāpā | āye avadha bhare paritāpā ||
viṣama biyoga na jāi bakhānā | avadhi āsa saba rākhahim̐ prānā ||

दो॰ 86दोहा

राम-दरस-हित नेम ब्रत, लगे करन नर नारि ।
मनहुँ कोक-कोकी-कमल, दीन बिहीन तमारि ॥

rāma-darasa-hita nema brata, lage karana nara nāri |
manahum̐ koka-kokī-kamala, dīna bihīna tamāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0