अयोध्याकाण्ड

अध्याय 85: सोती प्रजा को छोड़ श्रीराम का प्रस्थान

5 श्लोक · 85 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सोती प्रजा को छोड़ श्रीराम का प्रस्थान

श्रीराम ने देखा कि प्रजा प्रेम के वश है, तो उनके दयालु हृदय में बड़ा दुख हुआ, क्योंकि करुणामय प्रभु पराई पीड़ा तुरन्त जान लेते हैं। उन्होंने कोमल वचनों से बहुत समझाया और धर्म के अनेक उपदेश दिए, पर प्रेम के कारण लोग नहीं लौटे। शील और स्नेह दोनों में से कोई छोड़ा नहीं जाता, इसलिए रघुराई असमंजस में पड़ गए। शोक और थकान से लोग सो गए, कुछ देवताओं की माया ने भी उनकी बुद्धि मोहित कर दी। जब रात के दो पहर बीते, तब श्रीराम ने प्रेम से मन्त्री से कहा कि हे तात, खोज मिटाकर रथ हाँको, दूसरे उपाय से बात नहीं बनेगी। शम्भु के चरणों में सिर नवाकर तीनों रथ पर चढ़े, और सुमन्त्र ने इधर उधर खोज छिपाते हुए तुरन्त रथ चला दिया।

85.1

रघुपति प्रजा प्रेम-बस देखी । सदय हृदयँ दुख भयउ बिसेखी ॥
करुनामय रघुनाथ गोसाँई । बेगि पाइअहिं पीर पराई ॥

raghupati prajā prema-basa dekhī | sadaya hṛdayam̐ dukha bhayau bisekhī ||
karunāmaya raghunātha gosām̐ī | begi pāiahiṃ pīra parāī ||

85.2

कहि सप्रेम मृदु बचन सुहाये । बहु बिधि राम लोग समुझाये ॥
किये धरम-उपदेस घनेरे । लोग प्रेम बस फिरहिँ न फेरे ॥

kahi saprema mṛdu bacana suhāye | bahu bidhi rāma loga samujhāye ||
kiye dharama-upadesa ghanere | loga prema basa phirahim̐ na phere ||

85.3

सील-सनेह छाड़ि नहिं जाई । असमञ्जस-बस भे रघुराई ॥
लोग सोग-श्रम-बस गये सोई । कछुक देव-माया मति मोई ॥

sīla-saneha chār̤i nahiṃ jāī | asamañjasa-basa bhe raghurāī ||
loga soga-śrama-basa gaye soī | kachuka deva-māyā mati moī ||

85.4

जबहिं जाम जुग, जामिनि बीती । राम सचिव सन कहेउ सप्रीती ॥
खोज मारि रथ हाँकहु ताता । आन उपायँ बनिहि नहिँ बाता ॥

jabahiṃ jāma juga, jāmini bītī | rāma saciva sana kaheu saprītī ||
khoja māri ratha hām̐kahu tātā | āna upāyam̐ banihi nahim̐ bātā ||

दो॰ 85दोहा

राम-लखन-सिय जान चढ़ि, सम्भु चरन सिर नाइ ।
सचिवँ चलायउ तुरत रथ, इत उत खोज दुराइ ॥

rāma-lakhana-siya jāna car̤hi, sambhu carana sira nāi |
sacivam̐ calāyau turata ratha, ita uta khoja durāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0