राम वियोग से व्याकुल लोग ऐसे खड़े रह गए मानो चित्र में लिखे हों, सारा नगर शोक का घना वन बन गया। तुलसीदास कहते हैं कि विधाता ने कैकेयी को भीलनी बना दिया, जिसने दसों दिशाओं में असहनीय दावानल लगा दिया। विरह की वह आग न सह सकने के कारण सब लोग पीछे दौड़े। सबने मन में ठाना कि राम, लक्ष्मण और सीता के बिना सुख नहीं, जहाँ राम हैं वहीं सारा समाज है, उनके बिना अवध किसी काम का नहीं। यह निश्चय कर वे देवताओं को भी दुर्लभ सुख के घर छोड़कर चल पड़े, क्योंकि जिन्हें राम के चरणकमल प्रिय हैं उन्हें विषय भोग नहीं बाँधते। बालकों और बूढ़ों को छोड़ सब साथ हो लिए, और पहले दिन रघुनाथ ने तमसा के तट पर निवास किया।