बन-देवी बन देव उदारा । करिहहिँ सासु ससुर सम सारा ॥
कुस-किसलय-साथरी सुहाई । प्रभु सँग मज्जु मनोज तुराई ॥
bana-devī bana deva udārā | karihahim̐ sāsu sasura sama sārā ||
kusa-kisalaya-sātharī suhāī | prabhu sam̐ga majju manoja turāī ||
5 श्लोक · 66 में से 326
सीता कहती हैं, उदार वनदेवी और वनदेवता सास ससुर की तरह मेरी सार सँभाल करेंगे। प्रभु के साथ कुश और कोमल पत्तों का सुन्दर बिछौना कामदेव की तोशक जैसा होगा। कन्द, मूल और फल अमृत जैसा आहार होंगे और पहाड़ अवध के सौ महलों के समान। क्षण क्षण प्रभु के चरणकमल देखकर मैं ऐसे प्रसन्न रहूँगी जैसे दिन में चकवी। हे नाथ, आपने वन के बहुत से दुःख, भय, विषाद और सन्ताप बताए, पर हे कृपानिधान, वे सब मिलकर भी प्रभु वियोग के लवलेश के बराबर नहीं। यह जानकर, हे सुजान शिरोमणि, मुझे साथ ले चलिए, छोड़िए मत। हे स्वामी, बहुत विनती क्या करूँ, आप करुणामय और अन्तर्यामी हैं। हे दीनबन्धु, शील और स्नेह के भंडार, यदि अवधि तक मुझे अवध में रखेंगे तो जान लीजिए, प्राण नहीं रहेंगे।
बन-देवी बन देव उदारा । करिहहिँ सासु ससुर सम सारा ॥
कुस-किसलय-साथरी सुहाई । प्रभु सँग मज्जु मनोज तुराई ॥
bana-devī bana deva udārā | karihahim̐ sāsu sasura sama sārā ||
kusa-kisalaya-sātharī suhāī | prabhu sam̐ga majju manoja turāī ||
कन्द-मूल-फल अमिय अहारू । अवध-सौध सत सरिस पहारू ॥
छिन छिन प्रभु-पद-कमल बिलोकि । रहिहउँ मुदित दिवस जिमि कोकी ॥
kanda-mūla-phala amiya ahārū | avadha-saudha sata sarisa pahārū ||
china china prabhu-pada-kamala biloki | rahihaum̐ mudita divasa jimi kokī ||
बन-दुख नाथ कहे बहुतेरे । भय विषाद परिताप घनेरे ॥
प्रभु-बियोग लवलेस समाना । सब मिलि होहिं न कृपानिधाना ॥
bana-dukha nātha kahe bahutere | bhaya viṣāda paritāpa ghanere ||
prabhu-biyoga lavalesa samānā | saba mili hohiṃ na kṛpānidhānā ||
अस जियँ जानि सुजान-सिरोमनि । लेइअ सङ्ग मोहि छाडिअ जनि ॥
बिनती बहुत करउँ का स्वामी । करुना-मय उर-अन्तरजामी ॥
asa jiyam̐ jāni sujāna-siromani | leia saṅga mohi chāḍia jani ||
binatī bahuta karaum̐ kā svāmī | karunā-maya ura-antarajāmī ||
राखिअ अवध जो अवधि लगि, रहत न जानिय प्रान ।
दीनबन्धु सुन्दर सुखद, सील-सनेह-निधान ॥
rākhia avadha jo avadhi lagi, rahata na jāniya prāna |
dīnabandhu sundara sukhada, sīla-saneha-nidhāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0