अयोध्याकाण्ड

अध्याय 60: वन सीता के योग्य नहीं

5 श्लोक · 60 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

वन सीता के योग्य नहीं

कौसल्या कहती हैं, विधाता ने वन के लिए कोल और किरातों की लड़कियाँ रची हैं, जो पत्थर के कीड़े जैसे कठोर स्वभाव की हैं। या तपस्वियों की स्त्रियाँ वन के योग्य हैं, जिन्होंने तप के लिए सब भोग त्याग दिए। बेटा, सीता वन में कैसे रहेगी, जो चित्र में बना बन्दर देखकर भी डर जाती है? मानसरोवर के सुन्दर कमलवन में विचरने वाली हंसिनी क्या गड्ढे के योग्य है? यह विचारकर जैसी आज्ञा हो, मैं जानकी को वैसी ही सीख दूँ। माता कहती हैं, यदि सीता घर रहे तो मुझे बड़ा सहारा होगा। माता की प्रिय वाणी सुनकर श्रीराम ने विवेक भरे प्रिय वचन कहकर माता को सन्तोष दिया, फिर वन के गुण दोष प्रकट करके जानकी को समझाने लगे।

60.1

बन हित कोल-किरात-किसोरी । रचीं बिरञ्चि बिषय-सुख-भोरी ॥
पाइन कृमि जिमि कठिन सुभाऊ । तिन्हहि कलेस न कानन काऊ ॥

bana hita kola-kirāta-kisorī | racīṃ birañci biṣaya-sukha-bhorī ||
pāina kṛmi jimi kaṭhina subhāū | tinhahi kalesa na kānana kāū ||

60.2

कै तापस-तिय कानन-जोगू । जिन्ह तप हेतु तजा सब भोगू ॥
सिय बन बसिहि तात केहि भाँती । चित्र लिखित कपि देखि डेराती ॥

kai tāpasa-tiya kānana-jogū | jinha tapa hetu tajā saba bhogū ||
siya bana basihi tāta kehi bhām̐tī | citra likhita kapi dekhi ḍerātī ||

60.3

सुर-सर सुभग बनज-बन चारी । डाबर जोग कि हंस-कुमारी ॥
अस बिचारि जस आयसु होई । मैं सिख देउँ जानकिहि सोई ॥

sura-sara subhaga banaja-bana cārī | ḍābara joga ki haṃsa-kumārī ||
asa bicāri jasa āyasu hoī | maiṃ sikha deum̐ jānakihi soī ||

60.4

जौँ सिय भवन रहइ कह अम्बा । मोहि कहँ होइ बहुत अवलम्बा ॥
सुनि रघुबीर मातु प्रिय-बानी । सील-सनेह-सुधाँ जनु सानी ॥

jaum̐ siya bhavana rahai kaha ambā | mohi kaham̐ hoi bahuta avalambā ||
suni raghubīra mātu priya-bānī | sīla-saneha-sudhām̐ janu sānī ||

दो॰ 60दोहा

कहि प्रिय बचन बिबेक-मय, कीन्हि मातु परितोष ।
लगे प्रबोधन जानकिहि, प्रगटि बिपिन गुन-दोष ॥

kahi priya bacana bibeka-maya, kīnhi mātu paritoṣa |
lage prabodhana jānakihi, pragaṭi bipina guna-doṣa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0