राखि न सकइ न कहि सक जाहू । दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू ॥
लिखत सुधाकर गा लिखि राहू । विधि-गति बाम सदा सब काहू ॥
rākhi na sakai na kahi saka jāhū | duhūm̐ bhām̐ti ura dāruna dāhū ||
likhata sudhākara gā likhi rāhū | vidhi-gati bāma sadā saba kāhū ||
5 श्लोक · 55 में से 326
कौसल्या न पुत्र को रोक सकती हैं, न जाने को कह सकती हैं; दोनों ओर हृदय में दारुण जलन है। विधाता की चाल सदा उलटी है, चन्द्रमा लिखने चला और राहु लिख गया। धर्म और स्नेह दोनों ने बुद्धि को घेर लिया, साँप और छछूँदर जैसी गति हो गई। पुत्र को रोकने का आग्रह करूँ तो धर्म जाता है और भाइयों में विरोध होता है; वन जाने को कहूँ तो बड़ी हानि है। फिर स्त्री धर्म समझकर, राम और भरत दोनों को समान पुत्र जानकर, उन्होंने भारी धैर्य धरकर कहा, बेटा, बलिहारी, तुमने अच्छा किया, पिता की आज्ञा सब धर्मों का शिरोमणि है। राज देने को कहकर वन दिया, इसका मुझे लेशमात्र दुःख नहीं। पर तुम्हारे बिना भरत, राजा और प्रजा को प्रचण्ड क्लेश होगा।
राखि न सकइ न कहि सक जाहू । दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू ॥
लिखत सुधाकर गा लिखि राहू । विधि-गति बाम सदा सब काहू ॥
rākhi na sakai na kahi saka jāhū | duhūm̐ bhām̐ti ura dāruna dāhū ||
likhata sudhākara gā likhi rāhū | vidhi-gati bāma sadā saba kāhū ||
धरम सनेह उभयँ मति घेरी । भइ गति साँप छुछुंदरि केरी ॥
राखउँ सुतहि करउँ अनुरोधू । धरम जाइ अरु बन्धु-बिरोधू ॥
dharama saneha ubhayam̐ mati gherī | bhai gati sām̐pa chuchuṃdari kerī ||
rākhaum̐ sutahi karaum̐ anurodhū | dharama jāi aru bandhu-birodhū ||
कहउँ जान बन तो बड़ि हानी । सङ्कट-सोच बिबस भइ रानी ॥
बहुरि समुझि तिय-धरम सयानी । रामु भरतु दोउ सुत सम जानी ॥
kahaum̐ jāna bana to bar̤i hānī | saṅkaṭa-soca bibasa bhai rānī ||
bahuri samujhi tiya-dharama sayānī | rāmu bharatu dou suta sama jānī ||
सरल सुभाउ राम महँतारी । बोली बचन धीर धरि भारी ॥
तात जाउँ बलि कीन्हेहु नीका । पितु आयसु सब धरमक टीका ॥
sarala subhāu rāma maham̐tārī | bolī bacana dhīra dhari bhārī ||
tāta jāum̐ bali kīnhehu nīkā | pitu āyasu saba dharamaka ṭīkā ||
राजु देन कहि दीन्ह बन, मोहि न सो दुख लेस ।
तुम्ह बिनु भरतहि भूपतिहि, प्रजहि प्रचंड कलेस ॥
rāju dena kahi dīnha bana, mohi na so dukha lesa |
tumha binu bharatahi bhūpatihi, prajahi pracaṃḍa kalesa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0