अयोध्याकाण्ड

अध्याय 52: कौसल्या का पुत्र पर उमड़ा स्नेह

5 श्लोक · 52 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

कौसल्या का पुत्र पर उमड़ा स्नेह

रघुकुल के तिलक श्रीराम ने दोनों हाथ जोड़कर प्रसन्न मन से माता के चरणों में सिर नवाया। कौसल्या ने आशीर्वाद दिया, उन्हें हृदय से लगाया और गहने तथा वस्त्र न्योछावर किए। माता बार बार मुख चूमती हैं, आँखों में प्रेम के आँसू हैं और शरीर पुलकित है। गोद में बैठाकर फिर हृदय से लगाती हैं, और स्नेह से उनके स्तनों से दूध बहने लगता है। उनका प्रेम और आनन्द कहा नहीं जाता, मानो कंगाल ने कुबेर का पद पा लिया हो। आदर से सुन्दर मुख निहारकर माता मधुर वचन बोलीं, बेटा, बताओ, वह मंगलकारी लग्न कब है, जिसकी सब नर नारी ऐसी आतुरता से प्रतीक्षा कर रहे हैं जैसे शरद ऋतु में स्वाती नक्षत्र की वर्षा की प्यासे चातक और चातकी।

52.1

रघुकुल-तिलक जारि दोउ हाथा । मुदित मातु-पद नायउ माथा ॥
दीन्हि असीस लाइ उर लीन्हे । भूषन-बसन निछावरि कीन्हे ॥

raghukula-tilaka jāri dou hāthā | mudita mātu-pada nāyau māthā ||
dīnhi asīsa lāi ura līnhe | bhūṣana-basana nichāvari kīnhe ||

52.2

बार बार मुख चुम्बति माता । नयन-नेह-जल पुलकित-गाता ॥
गोद राखि पुनि हृदयँ लगाये । स्त्रवत प्रेनरस पयद सुहाये ॥

bāra bāra mukha cumbati mātā | nayana-neha-jala pulakita-gātā ||
goda rākhi puni hṛdayam̐ lagāye | stravata prenarasa payada suhāye ||

52.3

प्रेम प्रमोद न कछु कहि जाई । रङ्क धनद-पदवी जनु पाई ॥
सादर सुन्दर बदन निहारी । बोली मधुर बचन महँतारी ॥

prema pramoda na kachu kahi jāī | raṅka dhanada-padavī janu pāī ||
sādara sundara badana nihārī | bolī madhura bacana maham̐tārī ||

52.4

कहहु तात जननी बलिहारी । कबहिं लगन मुद-मङ्गलकारी ॥
सुकृत-सील सुख सीवँ सुहाई । जनम-लाभ कइ अवधि अघाई ॥

kahahu tāta jananī balihārī | kabahiṃ lagana muda-maṅgalakārī ||
sukṛta-sīla sukha sīvam̐ suhāī | janama-lābha kai avadhi aghāī ||

दो॰ 52दोहा

जेहि चाहत नर नारि सब, अति आरत एहि भाँति ।
जिमि चातक चातकि तृषित, वृष्टि सरद-रितु स्वाति ॥

jehi cāhata nara nāri saba, ati ārata ehi bhām̐ti |
jimi cātaka cātaki tṛṣita, vṛṣṭi sarada-ritu svāti ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0