अयोध्याकाण्ड

अध्याय 51: अयोध्या का विलाप, श्रीराम का उल्लास

5 श्लोक · 51 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

अयोध्या का विलाप, श्रीराम का उल्लास

कैकेयी कोई उत्तर नहीं देती, असह्य क्रोध से रूखी होकर स्त्रियों को ऐसे देखती है जैसे भूखी बाघिन हिरनियों को। रोग को असाध्य जानकर वे उसे मन्दबुद्धि और अभागी कहती हुई चली गईं। नगर के नर नारी विलाप करते और उस कुचाली को करोड़ों गालियाँ देते हैं। विषम ज्वर से जलते हुए वे लम्बी साँसें लेते हैं कि राम के बिना जीने की क्या आशा? प्रजा ऐसे व्याकुल है जैसे पानी सूखने पर जलचर। इस शोक के बीच श्रीराम माता के पास गए। उनका मुख प्रसन्न था और मन में चौगुना उत्साह, क्योंकि यह चिन्ता मिट गई कि राजा रोक लेंगे। जैसे नया हाथी खूँटे से छूटे, वैसे ही राज्य का बन्धन छूटा जानकर वन जाने की बात से उनका आनन्द बढ़ गया।

51.1

उतरु न देइ दुसह रिस रूखी । मृगिन्ह चितव जनु बाघिनि भूखी ॥
ब्याधि असाधि जानि तिन्ह त्यागी । चलीँ कहत मतिमन्द अभागी ॥

utaru na dei dusaha risa rūkhī | mṛginha citava janu bāghini bhūkhī ||
byādhi asādhi jāni tinha tyāgī | calīm̐ kahata matimanda abhāgī ||

51.2

राजु करत यह दैव बिगोई । कीन्हेसि अस जस करइ न कोई ॥
एहि बिधि बिलपहिँ पुर-नर-नारीं । देहिँ कुचालिहि कोटिक गारीं ॥

rāju karata yaha daiva bigoī | kīnhesi asa jasa karai na koī ||
ehi bidhi bilapahim̐ pura-nara-nārīṃ | dehim̐ kucālihi koṭika gārīṃ ||

51.3

जरहिँ विषम-जर लेहिँ उसासा । कवनि राम बिनु जीवन आसा ॥
बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी । जनु जलचर गन सूखत पानी ॥

jarahim̐ viṣama-jara lehim̐ usāsā | kavani rāma binu jīvana āsā ||
bipula biyoga prajā akulānī | janu jalacara gana sūkhata pānī ||

51.4

अति विषाद-बस लोग लोगाई । गये मातु पहिँ राम गोसाँई ॥
मुख प्रसन्न चित-चौगुन चाऊ । मिटा सोच जनि राखै राऊ ॥

ati viṣāda-basa loga logāī | gaye mātu pahim̐ rāma gosām̐ī ||
mukha prasanna cita-cauguna cāū | miṭā soca jani rākhai rāū ||

दो॰ 51दोहा

नव गयन्द रघुबीर मनु, राज अलान समान ।
छूट जानि बन-गवनु सुनि, उर अनन्द अधिकान ॥

nava gayanda raghubīra manu, rāja alāna samāna |
chūṭa jāni bana-gavanu suni, ura ananda adhikāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0