एक विधातहि दूषन देंहीं । सुधा देखाइ दीन्ह बिष जेहीं ॥
खरभरु नगर सोच सब काहू । दुसह दाह उर मिटा उछाहू ॥
eka vidhātahi dūṣana deṃhīṃ | sudhā dekhāi dīnha biṣa jehīṃ ||
kharabharu nagara soca saba kāhū | dusaha dāha ura miṭā uchāhū ||
5 श्लोक · 49 में से 326
कुछ लोग विधाता को दोष देते हैं, जिसने अमृत दिखाकर विष दे दिया। सारे नगर में खलबली है, हृदय में असह्य जलन है और उत्साह मिट गया है। तब कुल की माननीय वृद्धाएँ, जो कैकेयी को अत्यन्त प्रिय थीं, उसके शील की सराहना करती हुई सीख देने लगीं, पर उनके वचन उसे बाण जैसे लगे। तुम सदा कहती थीं कि भरत मुझे राम के समान प्रिय नहीं, यह सारा संसार जानता है। आज किस अपराध से राम को वन देती हो? तुमने कभी सौतिया डाह नहीं किया, तुम्हारी प्रीति सारा देश जानता है। कौसल्या ने क्या बिगाड़ा कि तुमने नगर पर वज्र गिरा दिया? क्या सीता पति का साथ छोड़ेंगी? क्या लक्ष्मण घर रहेंगे? क्या भरत राज भोगेंगे? क्या राजा राम के बिना जीवित रहेंगे?
एक विधातहि दूषन देंहीं । सुधा देखाइ दीन्ह बिष जेहीं ॥
खरभरु नगर सोच सब काहू । दुसह दाह उर मिटा उछाहू ॥
eka vidhātahi dūṣana deṃhīṃ | sudhā dekhāi dīnha biṣa jehīṃ ||
kharabharu nagara soca saba kāhū | dusaha dāha ura miṭā uchāhū ||
बिप्रबधू-कुलमान्य-जठेरी । जे प्रिय परम कैकेई केरी ॥
लगीँ देन सिख सील सराही । बचन बान सम लागहिँ नाही ॥
biprabadhū-kulamānya-jaṭherī | je priya parama kaikeī kerī ||
lagīm̐ dena sikha sīla sarāhī | bacana bāna sama lāgahim̐ nāhī ||
भरत न मोहि प्रिय राम समाना । सदा कहहु यह सब जग जाना ॥
करहु राम पर सहज सनेहू । केहिं अपराध आजु बन देहू ॥
bharata na mohi priya rāma samānā | sadā kahahu yaha saba jaga jānā ||
karahu rāma para sahaja sanehū | kehiṃ aparādha āju bana dehū ||
कबहुँ न कियहु सवति आरेसू । प्रीति प्रतीति जान सब देसू ॥
कौसल्याँ अब काह बिगारा । तुम्ह जेहि लागि बज्र पुर पारा ॥
kabahum̐ na kiyahu savati āresū | prīti pratīti jāna saba desū ||
kausalyām̐ aba kāha bigārā | tumha jehi lāgi bajra pura pārā ||
सीय कि पिय सँग परिहरिहि, लखन कि रहिहहिं धाम ।
राज कि भूँजब भरत पुर, नृप कि जिइहि बिनु राम ॥
sīya ki piya sam̐ga pariharihi, lakhana ki rahihahiṃ dhāma |
rāja ki bhūm̐jaba bharata pura, nṛpa ki jiihi binu rāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0