का सुनाइ बिधि काह सुनावा । का देखाइ वह काह देखावा ॥
एक कहहिँ भल भूप न कीन्हा । बरु बिचारि नहिँ कुमतिहि दीन्हा ॥
kā sunāi bidhi kāha sunāvā | kā dekhāi vaha kāha dekhāvā ||
eka kahahim̐ bhala bhūpa na kīnhā | baru bicāri nahim̐ kumatihi dīnhā ||
5 श्लोक · 48 में से 326
पुरवासी कहते हैं कि विधाता ने क्या सुनाकर क्या सुना दिया, क्या दिखाकर क्या दिखा दिया। कुछ कहते हैं कि राजा ने बिना विचारे दुर्बुद्धि स्त्री को वर दे दिया; ज्ञान और गुणों के भंडार होकर भी स्त्री के वश में हठ कर सब दुःखों के पात्र बने। धर्म की मर्यादा जानने वाले समझदार लोग राजा को दोष नहीं देते और शिबि, दधीचि और हरिश्चन्द्र की कथा कहते हैं। कुछ कहते हैं कि इसमें भरत की सम्मति है, कुछ सुनकर चुप रह जाते हैं। कुछ कान बन्द कर, जीभ दबाकर कहते हैं कि यह झूठ है; ऐसा कहने से पुण्य नष्ट होते हैं, भरत को राम प्राणों से प्यारे हैं। चन्द्रमा भले आग बरसाए, अमृत भले विष हो जाए, पर भरत सपने में भी राम के विरुद्ध कुछ नहीं करेंगे।
का सुनाइ बिधि काह सुनावा । का देखाइ वह काह देखावा ॥
एक कहहिँ भल भूप न कीन्हा । बरु बिचारि नहिँ कुमतिहि दीन्हा ॥
kā sunāi bidhi kāha sunāvā | kā dekhāi vaha kāha dekhāvā ||
eka kahahim̐ bhala bhūpa na kīnhā | baru bicāri nahim̐ kumatihi dīnhā ||
जो हठि भयउ सकल-दुख-भाजन । अबला-बिबस ज्ञान-गुन-गा जनु ॥
एक धरम-परमिति पहिचाने । नृपहि दोस नहिँ देहिँ सयाने ॥
jo haṭhi bhayau sakala-dukha-bhājana | abalā-bibasa jñāna-guna-gā janu ||
eka dharama-paramiti pahicāne | nṛpahi dosa nahim̐ dehim̐ sayāne ||
सिबि दधीचि हरिचन्द कहानी । एक एक सन कहहिँ बखानी ॥
एक भरत कर सम्मत कहहीँ । एक उदास-भायँ सुनि रहहीं ॥
sibi dadhīci haricanda kahānī | eka eka sana kahahim̐ bakhānī ||
eka bharata kara sammata kahahīm̐ | eka udāsa-bhāyam̐ suni rahahīṃ ||
कान मूँदि कर रद गहि जीहा । एक कहहिं यह बात अलीहा ॥
सुकृत जाहिँ अस कहत तुम्हारे । राम भरत कहूँ प्रान-पियारे ॥
kāna mūm̐di kara rada gahi jīhā | eka kahahiṃ yaha bāta alīhā ||
sukṛta jāhim̐ asa kahata tumhāre | rāma bharata kahūm̐ prāna-piyāre ||
चन्द चवै बरु अनल-कन, सुधा होइ बिष-तूल ।
सपनेहुँ कबहुँ कि करहिं किछु, भरत राम-प्रतिकूल ॥
canda cavai baru anala-kana, sudhā hoi biṣa-tūla |
sapanehum̐ kabahum̐ ki karahiṃ kichu, bharata rāma-pratikūla ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0