अयोध्याकाण्ड

अध्याय 42: श्रीराम वनवास को सौभाग्य मानते हैं

5 श्लोक · 42 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम वनवास को सौभाग्य मानते हैं

श्रीराम प्रसन्न होकर कैकेयी को उत्तर देते हैं। प्राणों से प्रिय भरत को राज्य मिलेगा, इसलिए आज विधाता हर प्रकार से अनुकूल है। ऐसे काम के लिए भी वे वन न जाएँ तो सबसे पहले उन्हें मूर्ख गिना जाए। कल्पवृक्ष छोड़कर अरंड सेवने वाले या अमृत छोड़कर विष माँगने वाले भी ऐसा अवसर नहीं चूकेंगे। उन्हें केवल एक दुःख है कि महाराज अत्यन्त व्याकुल हैं; इतनी छोटी बात से पिता को इतना कष्ट हो, इसका विश्वास नहीं होता। ऐसे धीर, गुणों के सागर राजा चुप हैं, तो अवश्य उनसे कोई बड़ा अपराध हुआ है। वे अपनी शपथ देकर सच पूछते हैं। कुटिल बुद्धि ने उनके सरल वचन टेढ़े समझे, जैसे समतल जल में भी जोंक टेढ़ी चलती है।

42.1

भरत प्रान-प्रियपावहिँ राजू । बिधि सब बिधि मोहि सनमुख आजु ॥
जौँ न जाउँ बन ऐसेहु काजा । प्रथम गनिय मोहि मूढ़ समाजा ॥

bharata prāna-priyapāvahim̐ rājū | bidhi saba bidhi mohi sanamukha āju ||
jaum̐ na jāum̐ bana aisehu kājā | prathama ganiya mohi mūr̤ha samājā ||

42.2

सेवहिँ अरँडु कलपतरु त्यागी । परिहरि अमृत लेहिँ विष मागी ॥
तेउ न पाइ अस समउ चुकाहीँ । देखु बिचारि मातु मन माहीं ॥

sevahim̐ aram̐ḍu kalapataru tyāgī | parihari amṛta lehim̐ viṣa māgī ||
teu na pāi asa samau cukāhīm̐ | dekhu bicāri mātu mana māhīṃ ||

42.3

अम्ब एक दुख मोहि बिसेखी । निपट बिकल नर-नायकु देखी ॥
थोरिहिं बात पितहि दुख भारी । होति प्रतीति न मोहि महँतारी ॥

amba eka dukha mohi bisekhī | nipaṭa bikala nara-nāyaku dekhī ||
thorihiṃ bāta pitahi dukha bhārī | hoti pratīti na mohi maham̐tārī ||

42.4

राउ धीर गुन-उदधि अगाधू । भा मोहि तेँ कछु बड़ अपराधू ॥
जा तेँ मोहि न कहत कछु राऊ । मोरि सपथ तोहि कहु सतिभाऊ ॥

rāu dhīra guna-udadhi agādhū | bhā mohi tem̐ kachu bar̤a aparādhū ||
jā tem̐ mohi na kahata kachu rāū | mori sapatha tohi kahu satibhāū ||

दो॰ 42दोहा

सहज सरल रघुबर बचन, कुमति कुटिल करि जान ।
चलइ जोँक जल बक्रगति, जद्यपि सलिलु समान ॥

sahaja sarala raghubara bacana, kumati kuṭila kari jāna |
calai jom̐ka jala bakragati, jadyapi salilu samāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0