सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी । बोलेउ राउ रहँसि मृदु-बानी ॥
नाथ राम करिअहिं जुबराजू । कहिय कृपा करि करिय समाजू ॥
saba bidhi guru prasanna jiyam̐ jānī | boleu rāu raham̐si mṛdu-bānī ||
nātha rāma kariahiṃ jubarājū | kahiya kṛpā kari kariya samājū ||
5 श्लोक · 4 में से 326
गुरु को प्रसन्न जानकर राजा एकान्त में कोमल वाणी से बोले: नाथ, श्रीराम को युवराज बनाइए, कृपा करके तैयारी की आज्ञा दीजिए। मेरे रहते यह उत्सव हो जाए, जिससे सब लोग नेत्रों का लाभ पा लें। शिव की कृपा से बाकी सब निभ गया, मन में यही एक लालसा है। इसके बाद शरीर रहे या जाए, कोई सोच नहीं, पीछे पछतावा न रहे। यह सुनकर मुनि का मन आनन्द से भर गया। वे बोले, राजन, जिससे विमुख होकर लोग पछताते हैं और जिसके भजन बिना हृदय की जलन नहीं मिटती, वही स्वामी तुम्हारा पुत्र बना है और पवित्र प्रेम का अनुगामी है। विलम्ब मत करो, शीघ्र सब सजाओ। शुभ दिन तभी है जब श्रीराम युवराज हों।
सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी । बोलेउ राउ रहँसि मृदु-बानी ॥
नाथ राम करिअहिं जुबराजू । कहिय कृपा करि करिय समाजू ॥
saba bidhi guru prasanna jiyam̐ jānī | boleu rāu raham̐si mṛdu-bānī ||
nātha rāma kariahiṃ jubarājū | kahiya kṛpā kari kariya samājū ||
मोहि अछत यह होइ उछाहू । लहहिँ लोग सब लोचन लाहू ॥
प्रभु प्रसाद सिव सबइ निबाहीँ । यह लालसा एक मन माहीं ॥
mohi achata yaha hoi uchāhū | lahahim̐ loga saba locana lāhū ||
prabhu prasāda siva sabai nibāhīm̐ | yaha lālasā eka mana māhīṃ ||
पुनि न सोच तनु रहउ कि जाऊ । जेहिं न होइ पाछें पछिताऊ ॥
सुनि मुनि दसरथ बचन सुहाये । मङ्गल-मोद-मूल मन भाये ॥
puni na soca tanu rahau ki jāū | jehiṃ na hoi pācheṃ pachitāū ||
suni muni dasaratha bacana suhāye | maṅgala-moda-mūla mana bhāye ||
सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीँ । जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं ॥
भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी । राम पुनीत प्रेम अनुगामी ॥
sunu nṛpa jāsu bimukha pachitāhīm̐ | jāsu bhajana binu jarani na jāhīṃ ||
bhayau tumhāra tanaya soi svāmī | rāma punīta prema anugāmī ||
बेगि बिलम्ब न करिय नृप, साजिअ सबइ समाज ।
सुदिन सुमङ्गल तबहिँ जब, राम होहिँ जुबराज ॥
begi bilamba na kariya nṛpa, sājia sabai samāja |
sudina sumaṅgala tabahim̐ jaba, rāma hohim̐ jubarāja ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0