अयोध्याकाण्ड

अध्याय 38: सुमन्त्र ने राजा को व्याकुल पाया

5 श्लोक · 38 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सुमन्त्र ने राजा को व्याकुल पाया

सब कहते हैं कि राजा नित्य पिछले पहर जागते हैं, आज हमें बड़ा आश्चर्य हो रहा है। सुमन्त्र, जाओ, जगाओ, आज्ञा पाकर काम करें। सुमन्त्र तब राजमहल में गए, पर वह भयानक लगता है, जाते डर लगता है, मानो दौड़कर खा जाएगा, देखा नहीं जाता, मानो विपत्ति और विषाद का डेरा हो। पूछने पर कोई उत्तर नहीं देता। वे वहाँ गए जहाँ राजा और कैकेयी थे। जयजीव कहकर सिर नवाकर बैठे और राजा की दशा देखकर सूख गए। राजा सोच से व्याकुल, रंग उड़ा हुआ, धरती पर पड़े हैं, मानो कमल जड़ से उखड़ गया हो। मंत्री डर के मारे पूछ नहीं सकते। तब अशुभ से भरी, शुभ से खाली कैकेयी बोली: राजा को रात भर नींद नहीं आई, कारण जगदीश जानें। राम-राम रटते सवेरा किया, पर मर्म नहीं बताते।

38.1

पछिले पहर भूप नित जागा । आजु हमहि बड़ अचरज लागा ॥
जाहु सुमन्त्र जगावहु जाई । कीजिअ काज रजायसु पाई ॥

pachile pahara bhūpa nita jāgā | āju hamahi bar̤a acaraja lāgā ||
jāhu sumantra jagāvahu jāī | kījia kāja rajāyasu pāī ||

38.2

गए सुमन्त्र तब राउर माहीं । देखि भयावन जात डेराहीं ॥
धाइ खाइ जनु जाइ न हेरा । मानहुँ बिपति बिषाद बसेरा ॥

gae sumantra taba rāura māhīṃ | dekhi bhayāvana jāta ḍerāhīṃ ||
dhāi khāi janu jāi na herā | mānahum̐ bipati biṣāda baserā ||

38.3

पूछें कोउ न ऊतरु देई । गए जेंहिं भवन भूप कैकैई ॥
कहि जयजीव बैठ सिर नाई । देखि भूप गति गयउ सुखाई ॥

pūcheṃ kou na ūtaru deī | gae jeṃhiṃ bhavana bhūpa kaikaiī ||
kahi jayajīva baiṭha sira nāī | dekhi bhūpa gati gayau sukhāī ||

38.4

सोच बिकल बिबरन महि परेऊ । मानहुँ, कमल मूलु परिहरेऊ ॥
सचिव सभीत सकइ नहिं पूछी । बोली असुभ-भरी सुभ-छूछी ॥

soca bikala bibarana mahi pareū | mānahum̐, kamala mūlu parihareū ||
saciva sabhīta sakai nahiṃ pūchī | bolī asubha-bharī subha-chūchī ||

दो॰ 38दोहा

परी न राजहि नींद निसि, हेतु जान जगदीस ।
राम राम रटि भोरु किय, कहइ न मरमु महीस ॥

parī na rājahi nīṃda nisi, hetu jāna jagadīsa |
rāma rāma raṭi bhoru kiya, kahai na maramu mahīsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0