राम राम रट बिकल भुआलू । जनु बिनु पङ्ख बिहँग बेहालू ॥
हृदयँ मनाव भोर जनि होई । रामहि जाइ कहइ जनि कोई ॥
rāma rāma raṭa bikala bhuālū | janu binu paṅkha biham̐ga behālū ||
hṛdayam̐ manāva bhora jani hoī | rāmahi jāi kahai jani koī ||
5 श्लोक · 37 में से 326
राम-राम रटते हुए राजा ऐसे बेहाल हैं जैसे बिना पंख का पक्षी। मन में मनाते हैं कि सवेरा न हो और कोई जाकर श्रीराम से न कहे। हे रघुकुल के गुरु सूर्य, उदय मत होना, अवध को देखकर तुम्हारे हृदय में शूल होगा। राजा के विलाप करते-करते भोर हो गई, द्वार पर वीणा, बाँसुरी और शंख की ध्वनि होने लगी। भाट विरद पढ़ते हैं, गवैये गुण गाते हैं, और राजा को वे बाण जैसे लगते हैं। कोई मंगल नहीं सुहाता, जैसे सती होने जाती स्त्री को गहने। उस रात श्रीराम के दर्शन की लालसा और उत्साह में किसी को नींद नहीं आई। द्वार पर सेवक और मंत्री सूर्य उगा देखकर कहते हैं कि अवधपति अब तक नहीं जागे, क्या विशेष कारण है।
राम राम रट बिकल भुआलू । जनु बिनु पङ्ख बिहँग बेहालू ॥
हृदयँ मनाव भोर जनि होई । रामहि जाइ कहइ जनि कोई ॥
rāma rāma raṭa bikala bhuālū | janu binu paṅkha biham̐ga behālū ||
hṛdayam̐ manāva bhora jani hoī | rāmahi jāi kahai jani koī ||
उदय करहु जनि रबि रघुकुल-गुर । अवध बिलोकि सूल होइहि उर ॥
भूप प्रीति कैकइ-कठिनाई । उभय अवधि विधि रची बनाई ॥
udaya karahu jani rabi raghukula-gura | avadha biloki sūla hoihi ura ||
bhūpa prīti kaikai-kaṭhināī | ubhaya avadhi vidhi racī banāī ||
बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा । बीना-बेनु-सङ्ख धुनि द्वारा ॥
पढ़हिं भाट गुन गावहिं गायक । सुनत नृपहि जनु लागहिँ सायक ॥
bilapata nṛpahi bhayau bhinusārā | bīnā-benu-saṅkha dhuni dvārā ||
par̤hahiṃ bhāṭa guna gāvahiṃ gāyaka | sunata nṛpahi janu lāgahim̐ sāyaka ||
मङ्गल सकल सोहाहिँ न कैसें । सहगामिनिहि विभूषन जैसें ॥
तेहिं निसि नींद परी नहिं काहू । राम दरस लालसा उछाहू ॥
maṅgala sakala sohāhim̐ na kaiseṃ | sahagāminihi vibhūṣana jaiseṃ ||
tehiṃ nisi nīṃda parī nahiṃ kāhū | rāma darasa lālasā uchāhū ||
द्वार और सेवक सचिव, कहहिं उदित रबि देखि ।
जागेउ अजहुँ न अवधपति, कारन कवन बिसेखि ॥
dvāra aura sevaka saciva, kahahiṃ udita rabi dekhi |
jāgeu ajahum̐ na avadhapati, kārana kavana bisekhi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0