चहत न भरत भूपतहि भोरें । विधि-बस कुमति बसी उर तोरें ॥
सो सब मोर पाप-परिनामू । भयउ कुठाहर जेहिं विधि बामू ॥
cahata na bharata bhūpatahi bhoreṃ | vidhi-basa kumati basī ura toreṃ ||
so saba mora pāpa-parināmū | bhayau kuṭhāhara jehiṃ vidhi bāmū ||
5 श्लोक · 36 में से 326
राजा बोले, भरत भूलकर भी राज्य नहीं चाहते, विधाता के वश तेरे हृदय में कुमति बस गई है। यह सब मेरे पापों का फल है, जिससे कुसमय में विधाता उलटा हो गया। सुन्दर अवध फिर भली भाँति बसेगी, सब गुणों के धाम श्रीराम की प्रभुता होगी, सब भाई सेवा करेंगे और तीनों लोकों में श्रीराम की बड़ाई होगी। पर तेरा कलंक और मेरा पछतावा मरने पर भी नहीं मिटेगा। अब तुझे जो अच्छा लगे वही कर, आँखों की ओट मुँह छिपाकर बैठ। हाथ जोड़कर कहता हूँ, जब तक जीऊँ, फिर कुछ मत कहना। अभागिनी, अन्त में पछताएगी, ताँत के लिए गाय मार रही है। करोड़ों प्रकार से समझाकर राजा पड़े रहे। कपट में सयानी वह कुछ नहीं बोलती, मानो श्मशान में जगाती बैठी हो।
चहत न भरत भूपतहि भोरें । विधि-बस कुमति बसी उर तोरें ॥
सो सब मोर पाप-परिनामू । भयउ कुठाहर जेहिं विधि बामू ॥
cahata na bharata bhūpatahi bhoreṃ | vidhi-basa kumati basī ura toreṃ ||
so saba mora pāpa-parināmū | bhayau kuṭhāhara jehiṃ vidhi bāmū ||
सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई । सब गुन धाम राम प्रभुताई ॥
करिहहिं भाइ सकल सेवकाई । होइहि तिहुँ पुर राम बड़ाई ॥
subasa basihi phiri avadha suhāī | saba guna dhāma rāma prabhutāī ||
karihahiṃ bhāi sakala sevakāī | hoihi tihum̐ pura rāma bar̤āī ||
तोर कलङ्क मोर पछिताऊ । मुएहुँ न मिटिहि न जाइहि काऊ ॥
अब तोहि नीक लाग करु सोई । लोचन ओट बैठु मुहु गोई ॥
tora kalaṅka mora pachitāū | muehum̐ na miṭihi na jāihi kāū ||
aba tohi nīka lāga karu soī | locana oṭa baiṭhu muhu goī ||
जब लगि जिऔं कहउँ कर जोरी । तब लगि जनि कछु कहसि बहोरी ॥
फिरि पछितैहसि अन्त अभागी । मारसि गाइ नहारु लागी ॥
jaba lagi jiauṃ kahaum̐ kara jorī | taba lagi jani kachu kahasi bahorī ||
phiri pachitaihasi anta abhāgī | mārasi gāi nahāru lāgī ||
परेउ राउ कहि कोटि विधि, काहे करसि निदान ।
कपट सयानि न कहति कछु, जागति मनहुँ मसान ॥
pareu rāu kahi koṭi vidhi, kāhe karasi nidāna |
kapaṭa sayāni na kahati kachu, jāgati manahum̐ masāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0