अयोध्याकाण्ड

अध्याय 35: कैकेयी के विषबुझे वचन, राजा का उत्तर

5 श्लोक · 35 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

कैकेयी के विषबुझे वचन, राजा का उत्तर

राजा व्याकुल हैं, सब अंग शिथिल हैं, मानो हथिनी ने कल्पवृक्ष गिरा दिया हो। गला सूख गया, मुँह से बोल नहीं निकलता, जैसे पानी बिना दीन पहिना मछली। कैकेयी फिर कड़वे कठोर वचन बोली, मानो घाव में विष भर रही हो। यदि अन्त में यही करना था, तो किस बल पर माँग-माँग कहा था? क्या ठठाकर हँसना और गाल फुलाना, दानी कहलाना और कंजूसी करना, एक साथ हो सकते हैं? या तो वचन छोड़ दो या धीरज धरो, अबला की तरह करुण विलाप मत करो। सत्यव्रती के लिए शरीर, स्त्री, पुत्र, घर, धन और धरती तिनके के समान कहे गए हैं। ये मर्मभेदी वचन सुनकर राजा बोले, तेरा कुछ दोष नहीं, मेरा काल पिशाच की तरह तुझे लगकर बोल रहा है।

35.1

ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता । करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता ॥
कंठ सूख मुख आव न बानी । जनु पाठीन दीन बिनु पानी ॥

byākula rāu sithila saba gātā | karini kalapataru manahum̐ nipātā ||
kaṃṭha sūkha mukha āva na bānī | janu pāṭhīna dīna binu pānī ||

35.2

पुनि कह कटु कठोर कैकेई । मनहुँ घाय महुँ माहुर देई ॥
जौँ अंतहुँ अस करतबु रहेऊ । मागु मागु तुम्ह केहिं बल कहेऊ ॥

puni kaha kaṭu kaṭhora kaikeī | manahum̐ ghāya mahum̐ māhura deī ||
jaum̐ aṃtahum̐ asa karatabu raheū | māgu māgu tumha kehiṃ bala kaheū ||

35.3

दुइ कि होइ एक समय भुआला । हँसब ठठाइ फुलाउब गाला ॥
दानि कहाउब अरु कृपनाई । होइ कि खेम कुसल रौताई ॥

dui ki hoi eka samaya bhuālā | ham̐saba ṭhaṭhāi phulāuba gālā ||
dāni kahāuba aru kṛpanāī | hoi ki khema kusala rautāī ||

35.4

छाड़हु बचनु कि धीरजु धरहू । जनि अबला जिमि करुना करहू ॥
तनु तिय तनय धामु धनु धरनी । सत्यसन्ध कहुँ तृन सम बरनी ॥

chār̤ahu bacanu ki dhīraju dharahū | jani abalā jimi karunā karahū ||
tanu tiya tanaya dhāmu dhanu dharanī | satyasandha kahum̐ tṛna sama baranī ||

दो॰ 35दोहा

मरम बचन सुनि राउ कह, कहु कछु दोष न तोर ।
लागेउ तोहि पिसाच जिमि, काल कहावत मोरि ॥

marama bacana suni rāu kaha, kahu kachu doṣa na tora |
lāgeu tohi pisāca jimi, kāla kahāvata mori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0