अयोध्याकाण्ड

अध्याय 312: पाँच दिन चित्रकूट के तीर्थों का दर्शन

5 श्लोक · 312 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

पाँच दिन चित्रकूट के तीर्थों का दर्शन

इस प्रकार भरत वन में फिरते हैं, और उनका नियम और प्रेम देखकर मुनि भी सकुचा जाते हैं। पवित्र जलाशय, भूमि के भाग, पक्षी, मृग, वृक्ष, घास, पर्वत, वन और बाग, जो सुन्दर, विचित्र और विशेष पवित्र हैं, उन सबको दिव्य देखकर भरत पूछते हैं, और ऋषिराज प्रसन्न मन से उनका कारण, नाम, गुण और पुण्य प्रभाव बताते हैं। कहीं स्नान, कहीं प्रणाम, कहीं मन को भाने वाले दृश्य देखना, कहीं आज्ञा पाकर बैठकर सीता सहित रघुराई का स्मरण। उनका स्वभाव, स्नेह और सेवा देखकर वनदेवता प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। ढाई पहर दिन बीतने पर वे लौटकर प्रभु के चरणकमलों के दर्शन करते हैं। भरत ने पाँच दिन में सब स्थल और तीर्थ देख लिये; फिर हरि हर का सुयश कहते सुनते दिन बीता और साँझ हुई।

312.1

एहि विधि भरतु फिरत बन माहीं । नेम प्रेम लखि मुनि सकुचाहीं ॥
पुन्य जलाश्रय भूमि बिभागा । खग मृग तरु तृन गिरि बन बागा ॥

ehi vidhi bharatu phirata bana māhīṃ | nema prema lakhi muni sakucāhīṃ ||
punya jalāśraya bhūmi bibhāgā | khaga mṛga taru tṛna giri bana bāgā ||

312.2

चारु विचित्र पवित्र बिसेखी । बूझत भरत दिव्य सब देखी ॥
सुनि मन मुदित कहत रिषिराऊ । हेतु नाम गुन पुन्य प्रभाऊ ॥

cāru vicitra pavitra bisekhī | būjhata bharata divya saba dekhī ||
suni mana mudita kahata riṣirāū | hetu nāma guna punya prabhāū ||

312.3

कतहुँ निमज्जन कतहुँ प्रनामा । कतहुँ बिलोकन मन अभिरामा ॥
कतहुँ बैठि सुनि आयसु पाई । सुमिरत सीय सहित रघुराई ॥

katahum̐ nimajjana katahum̐ pranāmā | katahum̐ bilokana mana abhirāmā ||
katahum̐ baiṭhi suni āyasu pāī | sumirata sīya sahita raghurāī ||

312.4

देखि सुभाउ सनेह सुसेवा । देहिँ असीस मुदित बनदेवा ॥
फिरहिँ गये दिन पहर अढ़ाई । प्रभु-पद-कमल बिलोकहिँ आई ॥

dekhi subhāu saneha susevā | dehim̐ asīsa mudita banadevā ||
phirahim̐ gaye dina pahara ar̤hāī | prabhu-pada-kamala bilokahim̐ āī ||

दो॰ 312दोहा

देखे थल तीरथ सकल, भरत पाँच दिन माझ ।
कहत सुनत हरि-हर-सुजस, गयउ दिवस भइ साँझ ॥

dekhe thala tīratha sakala, bharata pām̐ca dina mājha |
kahata sunata hari-hara-sujasa, gayau divasa bhai sām̐jha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0