भरत अत्रि अनुसासन पाई । जल-भाजन सब दिये चलाई ॥
सानुज आपु अत्रि मुनि साधू । सहित गये जहँ कूप अगाधू ॥
bharata atri anusāsana pāī | jala-bhājana saba diye calāī ||
sānuja āpu atri muni sādhū | sahita gaye jaham̐ kūpa agādhū ||
5 श्लोक · 310 में से 326
अत्रि की आज्ञा पाकर भरत ने सब जलपात्र आगे भिजवा दिए और स्वयं शत्रुघ्न, अत्रि मुनि और साधुओं के साथ उस अथाह कूप पर गए। उस पुण्यस्थल में पवित्र जल रखा गया, और प्रेम से प्रसन्न होकर अत्रि ने कहा, तात, यह स्थान अनादि काल से सिद्ध है; काल ने इसे लुप्त कर दिया था, किसी को इसका पता न था। सेवकों ने यहाँ कूप बनाया, और विधिवश यह जगत का उपकार हो गया। अब लोग इसे भरतकूप कहेंगे, सब तीर्थों के जल से युक्त अत्यन्त पवित्र। जो प्राणी प्रेम और नियम से इसमें स्नान करेंगे, वे कर्म, मन और वाणी से निर्मल होंगे। कूप की महिमा कहते हुए सब रघुराज के पास गए, और अत्रि ने रघुबर को उस तीर्थ का पुण्य प्रभाव सुनाया।
भरत अत्रि अनुसासन पाई । जल-भाजन सब दिये चलाई ॥
सानुज आपु अत्रि मुनि साधू । सहित गये जहँ कूप अगाधू ॥
bharata atri anusāsana pāī | jala-bhājana saba diye calāī ||
sānuja āpu atri muni sādhū | sahita gaye jaham̐ kūpa agādhū ||
पावन-पाथ पुन्यथल राखा । प्रमुदित प्रेम अत्रि अस भाखा ॥
तात अनादि सिद्ध थल एहू । लोपेउ काल विदित नहिँ केहू ॥
pāvana-pātha punyathala rākhā | pramudita prema atri asa bhākhā ||
tāta anādi siddha thala ehū | lopeu kāla vidita nahim̐ kehū ||
तब सेवकन्ह सरल थल देखा । कीन्ह सुजल हित कूप बिसेखा ॥
विधि-बस भयउ बिस्व उपकारू । सुगम अगम अति धरम बिचारू ॥
taba sevakanha sarala thala dekhā | kīnha sujala hita kūpa bisekhā ||
vidhi-basa bhayau bisva upakārū | sugama agama ati dharama bicārū ||
भरतकूप अब कहिहहिँ लोगा । अति पावन तीरथ-जल जोगा ॥
प्रेम सनेम निमज्जत प्रानी । होइहहिँ बिमल करम मन बानी ॥
bharatakūpa aba kahihahim̐ logā | ati pāvana tīratha-jala jogā ||
prema sanema nimajjata prānī | hoihahim̐ bimala karama mana bānī ||
कहत कूप महिमा सकल, गये जहाँ रघुराउ ।
अत्रि सुनायउ रघुबरहि, तीरथ पुन्य प्रभाउ ॥
kahata kūpa mahimā sakala, gaye jahām̐ raghurāu |
atri sunāyau raghubarahi, tīratha punya prabhāu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0