धन्य भरत जय राम गोसाँई । कहत देव हरषत बरिआई ॥
मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू । भरत बचन सुनि भयउ उछाहू ॥
dhanya bharata jaya rāma gosām̐ī | kahata deva haraṣata bariāī ||
muni mithilesa sabhām̐ saba kāhū | bharata bacana suni bhayau uchāhū ||
5 श्लोक · 309 में से 326
धन्य भरत, जय स्वामी राम, कहकर देवता बरबस हर्षित होते हैं। भरत के वचन सुनकर मुनि, मिथिलेश और सारी सभा में उत्साह छा गया। पुलकित होकर राजा विदेह भरत और राम के गुणों और स्नेह की प्रशंसा करते हैं: सेवक और स्वामी दोनों का स्वभाव सुहावना है, उनका नियम और प्रेम पवित्र से भी पवित्र। मन्त्री और सभासद भी अनुराग से अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार सराहने लगे। राम भरत संवाद सुनकर दोनों समाजों के हृदय में हर्ष और विषाद दोनों हैं। राम की माता ने दुःख सुख को समान जानकर राम के गुण कहकर रानियों को समझाया; कोई रघुबीर की बड़ाई करता है, कोई भरत की भलाई। तब अत्रि ने भरत से कहा, पर्वत के पास एक सुन्दर कुआँ है; तीर्थों का पवित्र, अमृत जैसा, अनुपम जल वहीं रखो।
धन्य भरत जय राम गोसाँई । कहत देव हरषत बरिआई ॥
मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू । भरत बचन सुनि भयउ उछाहू ॥
dhanya bharata jaya rāma gosām̐ī | kahata deva haraṣata bariāī ||
muni mithilesa sabhām̐ saba kāhū | bharata bacana suni bhayau uchāhū ||
भरत राम गुन-ग्राम सनेहू । पुलकि प्रसंसत राउ-बिदेहू ॥
सेवक स्वामि सुभाउ सुहावन । नेम पेमु अति पावन पावन ॥
bharata rāma guna-grāma sanehū | pulaki prasaṃsata rāu-bidehū ||
sevaka svāmi subhāu suhāvana | nema pemu ati pāvana pāvana ||
मति अनुसार सराहन लागे । सचिव सभासद सब अनुरागे ॥
सुनि सुनि राम-भरत-सम्बादू । दुहुँ समाज हियँ हरष बिषादू ॥
mati anusāra sarāhana lāge | saciva sabhāsada saba anurāge ||
suni suni rāma-bharata-sambādū | duhum̐ samāja hiyam̐ haraṣa biṣādū ||
राम-मातु दुख सुख सम जानी । कहि गुन राम प्रबोधीं रानी ॥
एक कहहिं रघुबीर बड़ाई । एक सराहत भरत भलाई ॥
rāma-mātu dukha sukha sama jānī | kahi guna rāma prabodhīṃ rānī ||
eka kahahiṃ raghubīra bar̤āī | eka sarāhata bharata bhalāī ||
अत्रि कहेउ तब भरत सन, सैल समीप सुकूप ।
राखिअ तीरथ तोय तहँ, पावन अमिय अनूप ॥
atri kaheu taba bharata sana, saila samīpa sukūpa |
rākhia tīratha toya taham̐, pāvana amiya anūpa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0