सुनहु प्रान-प्रिय भावत जी का । देहु एक बर भरतहि टीका ॥
माँगउँ दूसर बर कर जोरी । पुरवहु नाथ मनोरथ मोरी ॥
sunahu prāna-priya bhāvata jī kā | dehu eka bara bharatahi ṭīkā ||
mām̐gaum̐ dūsara bara kara jorī | puravahu nātha manoratha morī ||
6 श्लोक · 29 में से 326
कैकेयी बोलीं, प्राणप्रिय, मन की बात सुनिए। एक वर दीजिए कि भरत का तिलक हो। दूसरा हाथ जोड़कर माँगती हूँ: श्रीराम तपस्वी के वेश में, पूर्ण उदासीन होकर, चौदह वर्ष वन में रहें। ये कोमल वचन सुनकर राजा का हृदय ऐसा व्याकुल हुआ जैसे चाँदनी छूते ही चकवा। वे सहम गए, कुछ कहते न बना, जैसे बाज़ ने बटेर पर झपट्टा मारा हो। रंग ऐसा उड़ा मानो ताड़ पर बिजली गिरी हो। माथे पर हाथ, आँखें मूँदे, मानो शोक ही देह धरकर सोच रहा हो। मेरा मनोरथ कल्पवृक्ष का फूल था, फल लगते ही हथिनी ने जड़ से उखाड़ दिया। कैकेयी ने अवध उजाड़ दिया। स्त्री का विश्वास करके मैं मारा गया, जैसे सिद्धि के समय अविद्या यति का नाश कर दे।
सुनहु प्रान-प्रिय भावत जी का । देहु एक बर भरतहि टीका ॥
माँगउँ दूसर बर कर जोरी । पुरवहु नाथ मनोरथ मोरी ॥
sunahu prāna-priya bhāvata jī kā | dehu eka bara bharatahi ṭīkā ||
mām̐gaum̐ dūsara bara kara jorī | puravahu nātha manoratha morī ||
तापस-बेष बिसेष उदासी । चौदह बरिस राम बन-बासी ॥
सुनि मृदु बचन भूप हियँ सोकू । ससि-कर छुअत बिकल जिमि कोकू ॥
tāpasa-beṣa biseṣa udāsī | caudaha barisa rāma bana-bāsī ||
suni mṛdu bacana bhūpa hiyam̐ sokū | sasi-kara chuata bikala jimi kokū ||
गयउ सहमि नहिँ कछु कहि आवा । जनु सचान बन झपटेउ लावा ॥
बिबरन भयउ निपट नरपालू । दामिनि हनेउ मनहुँ तरु तालू ॥
gayau sahami nahim̐ kachu kahi āvā | janu sacāna bana jhapaṭeu lāvā ||
bibarana bhayau nipaṭa narapālū | dāmini haneu manahum̐ taru tālū ||
माथे हाथ मूदि दोउ लोचन । तनु धरि सोच लाग जनु सोचन ॥
मोर मनोरथ सुरतरु-फूला । फरत करिनि जिमि हतेउ समूला ॥
māthe hātha mūdi dou locana | tanu dhari soca lāga janu socana ||
mora manoratha surataru-phūlā | pharata karini jimi hateu samūlā ||
अवध उजारि कीन्हि कैकेईं । दीन्हसि अचल बिपति के नेईं ॥
avadha ujāri kīnhi kaikeīṃ | dīnhasi acala bipati ke neīṃ ||
कवनें अवसर का भयउ, गयउँ नारि बिस्वास ।
जोग-सिद्धि-फल समय जिमि, जतिहि अबिद्या नास ॥
kavaneṃ avasara kā bhayau, gayaum̐ nāri bisvāsa |
joga-siddhi-phala samaya jimi, jatihi abidyā nāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0