अयोध्याकाण्ड

अध्याय 28: रघुकुल रीति: प्राण जाएँ पर वचन न जाए

5 श्लोक · 28 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

रघुकुल रीति: प्राण जाएँ पर वचन न जाए

राजा हँसकर बोले, अब मर्म समझा, तुम्हें रूठना बहुत प्रिय है। तुमने धरोहर रखकर कभी माँगा नहीं, और मैं भूल गया। मुझे झूठा दोष मत दो, दो के बदले चार माँग लो। रघुकुल में सदा से रीति है कि प्राण जाएँ पर वचन न जाए। असत्य के समान पापों का समूह नहीं, क्या करोड़ों घुँघचियाँ पहाड़ के बराबर होंगी? सब पुण्यों की जड़ सत्य है, यह वेद-पुराण कहते हैं और मनु ने गाया है। फिर उन्होंने स्नेह की सीमा श्रीराम की शपथ भी कर ली। बात पक्की कराकर वह कुमति हँसकर बोली, मानो कुमत रूपी बाज़ की टोपी खोल दी हो, जिसे भीलनी की तरह वह राजा के सुख रूपी पक्षियों के वन पर छोड़ना चाहती है।

28.1

जानेउँ मरम राउ हँसि कहई । तुम्हहिँ कोहाब परम प्रिय अहई ॥
थाती राखि न मागिहु काऊ । बिसरि गयउ मोहि भोर सुभाऊ ॥

jāneum̐ marama rāu ham̐si kahaī | tumhahim̐ kohāba parama priya ahaī ||
thātī rākhi na māgihu kāū | bisari gayau mohi bhora subhāū ||

28.2

झूठेहुँ हमहिँ दोष जनि देहू । दुइ कै चारि माँगि मकु लेहू ॥
रघुकुल-रीति सदा चलि आई । प्रान जाहु बरु बचन न जाई ॥

jhūṭhehum̐ hamahim̐ doṣa jani dehū | dui kai cāri mām̐gi maku lehū ||
raghukula-rīti sadā cali āī | prāna jāhu baru bacana na jāī ||

28.3

नहिँ असत्य सम पातक-पुञ्जा । गिरि सम होहिँ कि कोटिक गुञ्जा ॥
सत्य-मूल सब सुकृत सुहाये । बेद पुरान बिदित मनु गाये ॥

nahim̐ asatya sama pātaka-puñjā | giri sama hohim̐ ki koṭika guñjā ||
satya-mūla saba sukṛta suhāye | beda purāna bidita manu gāye ||

28.4

तेहि पर राम-सपथ करि आई । सुकृत-सनेह-अवधि रघुराई ॥
बात दृढाइ कुमति हँसि बोली । कुमत-कुबिहग कुलह जनु खोली ॥

tehi para rāma-sapatha kari āī | sukṛta-saneha-avadhi raghurāī ||
bāta dṛḍhāi kumati ham̐si bolī | kumata-kubihaga kulaha janu kholī ||

दो॰ 28दोहा

भूप मनोरथ सुभग बन, सुख सुबिहङ्ग समाज ।
भिल्लनि जिमि छाड़न चहति, बचन भयङ्कर बाज ॥

bhūpa manoratha subhaga bana, sukha subihaṅga samāja |
bhillani jimi chār̤ana cahati, bacana bhayaṅkara bāja ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0