इस प्रसाद असीस तुम्हारी । सुत सुतबधू देवसरि-बारी ॥
राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ । सो करि कहउँ सखी सति भाऊ ॥
isa prasāda asīsa tumhārī | suta sutabadhū devasari-bārī ||
rāma sapatha maiṃ kīnha na kāū | so kari kahaum̐ sakhī sati bhāū ||
5 श्लोक · 283 में से 326
कौसल्या सुनयना से कहती हैं, आपके प्रसाद और आशीर्वाद से मेरे पुत्र और पुत्रवधुएँ गंगाजल के समान पवित्र हैं। मैंने कभी राम की शपथ नहीं खाई, सो आज खाकर सच्चे भाव से कहती हूँ। भरत के शील, गुण, विनय और बड़ाई, का वर्णन करने में शारदा की बुद्धि भी हिचकती है; क्या सीपी से सागर उलीचा जा सकता है? मैं सदा भरत को कुल का दीपक जानती हूँ, महाराज ने भी मुझसे बार बार यही कहा। सोना कसौटी पर परखा जाता है, पुरुष समय आने पर। गंगा जैसी पावन वाणी सुनकर सब रानियाँ स्नेह से विकल हो गईं। फिर कौसल्या धीरज धरकर कहती हैं, हे मिथिलेश्वरी, विवेक के सागर की पत्नी को कौन उपदेश दे सकता है?
इस प्रसाद असीस तुम्हारी । सुत सुतबधू देवसरि-बारी ॥
राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ । सो करि कहउँ सखी सति भाऊ ॥
isa prasāda asīsa tumhārī | suta sutabadhū devasari-bārī ||
rāma sapatha maiṃ kīnha na kāū | so kari kahaum̐ sakhī sati bhāū ||
भरत सील गुन बिनय बड़ाई । भायप भगति भरोस भलाई ॥
कहत सारदहु कर मति हीचे । सागर सीपि कि जाहिँ उलीचे ॥
bharata sīla guna binaya bar̤āī | bhāyapa bhagati bharosa bhalāī ||
kahata sāradahu kara mati hīce | sāgara sīpi ki jāhim̐ ulīce ||
जानउँ सदा भरत कुल दीपा । बार बार मोहि कहेउ महीपा ॥
कसें कनक मनि पारिखि पाये । पुरुष परिखिअहिं समयँ सुभाये ॥
jānaum̐ sadā bharata kula dīpā | bāra bāra mohi kaheu mahīpā ||
kaseṃ kanaka mani pārikhi pāye | puruṣa parikhiahiṃ samayam̐ subhāye ||
अनुचित आजु कहब अस मोरा । लोक सनेहँ सयानप थोरा ॥
सुनि सुरसरि सम पावनि बानी । भईँ सनेह बिकल सब रानी ॥
anucita āju kahaba asa morā | loka saneham̐ sayānapa thorā ||
suni surasari sama pāvani bānī | bhaīm̐ saneha bikala saba rānī ||
कौसल्या कह धीर धरि, सुनहु देबि मिथिलेसि ।
को बिबेकनिधि बल्लभहि, तुम्हहिँ सकइ उपदेसि ॥
kausalyā kaha dhīra dhari, sunahu debi mithilesi |
ko bibekanidhi ballabhahi, tumhahim̐ sakai upadesi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0