सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा । बिधि गति बड़ि बिपरीत विचित्रा ॥
जो सृजि पालइ हरइ बहोरी । बाल केलि सम बिधि मति भोरी ॥
suni sasoca kaha debi sumitrā | bidhi gati bar̤i biparīta vicitrā ||
jo sṛji pālai harai bahorī | bāla keli sama bidhi mati bhorī ||
5 श्लोक · 282 में से 326
सुमित्रा कहती हैं, विधि की गति विपरीत है; वह बालक के खेल की तरह रचता, पालता और फिर नष्ट करता है। कौसल्या कहती हैं, किसी का दोष नहीं; दुःख, सुख, हानि, लाभ सब कर्म के वश हैं। कर्म की कठिन गति विधाता ही जानता है, जो शुभ अशुभ सब फल देता है। ईश्वर की आज्ञा ही उत्पत्ति, पालन और लय की, विष और अमृत की, सबकी मालिक है। मोहवश सोच करना व्यर्थ है; विधि का यह प्रपंच अटल और अनादि है। सीता की माता कहती हैं, सत्य वचन, आप पुण्यात्माओं की सीमा, अवधपति की रानी हैं। गद्गद होकर कौसल्या कहती हैं, लक्ष्मण, राम, सीता वन जाएँ, परिणाम भला ही होगा, बुरा नहीं; मुझे तो भरत की चिन्ता है।
सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा । बिधि गति बड़ि बिपरीत विचित्रा ॥
जो सृजि पालइ हरइ बहोरी । बाल केलि सम बिधि मति भोरी ॥
suni sasoca kaha debi sumitrā | bidhi gati bar̤i biparīta vicitrā ||
jo sṛji pālai harai bahorī | bāla keli sama bidhi mati bhorī ||
कौसल्या कह दोस न काहू । करम-बिबस दुख-सुख छति लाहू ॥
कठिन करम-गति जान विधाता । जो सुभ असुभ सकल फल दाता ॥
kausalyā kaha dosa na kāhū | karama-bibasa dukha-sukha chati lāhū ||
kaṭhina karama-gati jāna vidhātā | jo subha asubha sakala phala dātā ||
ईस रजाइ सीस सबही कें । उतपति थिति लय बिषहु अमी कें ॥
देबि मोह बस सोचिअ बादी । विधि प्रपञ्च अस अचल अनादी ॥
īsa rajāi sīsa sabahī keṃ | utapati thiti laya biṣahu amī keṃ ||
debi moha basa socia bādī | vidhi prapañca asa acala anādī ||
भूपति जिअब मरब उर आनी । सोचिअ सखि लखि निज हित हानी ॥
सीय मातु कह सत्य सुबानी । सुकृती-अवधि अवधपति-रानी ॥
bhūpati jiaba maraba ura ānī | socia sakhi lakhi nija hita hānī ||
sīya mātu kaha satya subānī | sukṛtī-avadhi avadhapati-rānī ||
लखन-राम-सिय जाहु बन, भल परिनाम न पोच ।
गहबरि हियँ कह कौसिला, मोहि भरत कर, सोच ॥
lakhana-rāma-siya jāhu bana, bhala parināma na poca |
gahabari hiyam̐ kaha kausilā, mohi bharata kara, soca ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0