एहि बिधि सकल मनोरथ करहीँ । बचन सप्रेम सुनत मन हरहीं ॥
सीय मातु तेहि समय पठाईं । दासीं देखि सुअवसर आईं ॥
ehi bidhi sakala manoratha karahīm̐ | bacana saprema sunata mana harahīṃ ||
sīya mātu tehi samaya paṭhāīṃ | dāsīṃ dekhi suavasara āīṃ ||
5 श्लोक · 281 में से 326
इस प्रकार सब मनोरथ करते हैं। उसी समय सीता की माता दासी भेजती हैं, जो अवसर देखकर आती है। सीता की सासें खाली हैं, यह सुनकर जनक का रनिवास आया। कौसल्या ने आदर से सम्मान करके समयोचित आसन दिए। दोनों ओर का शील और स्नेह देखकर वज्र भी पिघल जाए। पुलकित, शिथिल तन, आँखों में जल, सब नखों से धरती कुरेदती सोच में डूबी हैं, मानो सिय राम प्रेम की मूर्तियाँ हों, मानो करुणा अनेक रूप धरकर बिलख रही हो। सीता की माता कहती हैं, विधाता की बुद्धि टेढ़ी है, जो दूध के फेन को वज्र की छेनी से फोड़ता है। सुनने में अमृत, देखने में सब विष; उसकी करनी कराल है, जहाँ तहाँ कौए, उल्लू और बगुले, हंस तो केवल मानसरोवर में।
एहि बिधि सकल मनोरथ करहीँ । बचन सप्रेम सुनत मन हरहीं ॥
सीय मातु तेहि समय पठाईं । दासीं देखि सुअवसर आईं ॥
ehi bidhi sakala manoratha karahīm̐ | bacana saprema sunata mana harahīṃ ||
sīya mātu tehi samaya paṭhāīṃ | dāsīṃ dekhi suavasara āīṃ ||
सावकास सुनि सब सिय सासू । आयउ जनकराज रनिवासू ॥
कौसल्याँ सादर सनमानी । आसन दिये समय सम आनी ॥
sāvakāsa suni saba siya sāsū | āyau janakarāja ranivāsū ||
kausalyām̐ sādara sanamānī | āsana diye samaya sama ānī ||
सील सनेह सकल दुहुँ ओरा । द्रवहिँ देखि सुनि कुलिस कठोरा ॥
पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन । महि नख लिखन लगीँ सब सोचन ॥
sīla saneha sakala duhum̐ orā | dravahim̐ dekhi suni kulisa kaṭhorā ||
pulaka sithila tana bāri bilocana | mahi nakha likhana lagīm̐ saba socana ||
सब सिय-शम प्रेम कि सि मूरति । जनु करुना बहु बेष बिसूरति ॥
सीय-मातु कह बिधि बुधि बाँकी । जो पय-फेन फोर पबि टाँकी ॥
saba siya-śama prema ki si mūrati | janu karunā bahu beṣa bisūrati ||
sīya-mātu kaha bidhi budhi bām̐kī | jo paya-phena phora pabi ṭām̐kī ||
सुनिय सुधा देखिय गरल, सब करतूति कराल ।
जहँ तहँ काक उलूक बक, मानस सकृत मराल ॥
suniya sudhā dekhiya garala, saba karatūti karāla |
jaham̐ taham̐ kāka ulūka baka, mānasa sakṛta marāla ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0