राजा बोले, प्रिये, तुम्हारा अहित किसने किया? किसके दो सिर हैं, किसे यमराज ले जाना चाहते हैं? कहो, किस कंगाल को राजा बना दूँ, किस राजा को देश से निकाल दूँ? तुम्हारा शत्रु अमर भी हो तो मार दूँ, बेचारे नर-नारी क्या हैं। तुम मेरा स्वभाव जानती हो, मेरा मन तुम्हारे मुखचन्द्र का चकोर है। मेरे प्राण, पुत्र, सर्वस्व, परिवार और प्रजा सब तुम्हारे वश में हैं। यदि कपट करके कुछ कहूँ तो मुझे श्रीराम की सौ शपथ। हँसकर मनचाहा माँगो, गहने पहनो और शीघ्र यह कुवेश छोड़ो। यह सुनकर और बड़ी शपथ का विचार करके वह मन्दबुद्धि हँसती हुई उठी और गहने पहनने लगी, मानो हिरन देखकर भीलनी फन्दा सजा रही हो।