सेवक बचन सत्य सब जाने । आश्रम निकट जाइ निअराने ॥
भरत दीख बन सैल समाजू । मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू ॥
sevaka bacana satya saba jāne | āśrama nikaṭa jāi niarāne ||
bharata dīkha bana saila samājū | mudita chudhita janu pāi sunājū ||
5 श्लोक · 235 में से 326
भरत जानते हैं कि सेवक के वचन सब सत्य हैं, और वे आश्रम के निकट पहुँचते हैं। वन और पर्वत का समाज देखकर ऐसे प्रसन्न होते हैं जैसे भूखे को अच्छा अन्न मिल जाए। उनकी दशा उस प्रजा जैसी है जो अकाल और भय से दुखी, तीनों तापों और बुरे ग्रहों से पीड़ित होकर अच्छे राज वाले सुखी देश में पहुँचे। राम के निवास से वन की संपत्ति ऐसे शोभती है जैसे सुराज पाकर प्रजा सुखी हो। तुलसीदास रूपक बाँधते हैं। वैराग्य मंत्री है, सुहावना पावन वन देश है, यम और नियम योद्धा हैं, पर्वत राजधानी है, शान्ति और सुमति पवित्र रानी हैं। राजा सब अंगों से संपन्न है और उसका चित्त राम के चरणों में है। मोह राजा की सेना जीतकर विवेक राजा नगर में निष्कंटक राज करता है।
सेवक बचन सत्य सब जाने । आश्रम निकट जाइ निअराने ॥
भरत दीख बन सैल समाजू । मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू ॥
sevaka bacana satya saba jāne | āśrama nikaṭa jāi niarāne ||
bharata dīkha bana saila samājū | mudita chudhita janu pāi sunājū ||
ईति भीति जनु प्रजा दुखारी । त्रिबिधि ताप पीड़ित ग्रह भारी ॥
जाइ सुराज सुदेस सुखारी । होहिं भरत गति तेहि अनुहारी ॥
īti bhīti janu prajā dukhārī | tribidhi tāpa pīr̤ita graha bhārī ||
jāi surāja sudesa sukhārī | hohiṃ bharata gati tehi anuhārī ||
राम-बास बन सम्पति भ्राजा । सुखी प्रजा जनु पाइ सुराजा ॥
सचिव बिराग बिबेकु नरेसू । विपिन सुहावन-पावन देसू ॥
rāma-bāsa bana sampati bhrājā | sukhī prajā janu pāi surājā ||
saciva birāga bibeku naresū | vipina suhāvana-pāvana desū ||
भट जम-नियम सैल-रजधानी । सान्ति सुमति सुचि सुन्दर रानी ॥
सकल अङ्ग सम्पन्न सुराऊ । राम चरन आश्रित चित चाऊ ॥
bhaṭa jama-niyama saila-rajadhānī | sānti sumati suci sundara rānī ||
sakala aṅga sampanna surāū | rāma carana āśrita cita cāū ||
जीति मोहि-महिपाल दल, सहित बिबेक भुआल ।
करत अकंटक राजु पुरँ, सुख सम्पदा सुकाल ॥
jīti mohi-mahipāla dala, sahita bibeka bhuāla |
karata akaṃṭaka rāju puram̐, sukha sampadā sukāla ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0