अयोध्याकाण्ड

अध्याय 229: भरत की सेना देखकर लक्ष्मण का क्रोध

5 श्लोक · 229 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

भरत की सेना देखकर लक्ष्मण का क्रोध

सहस्रबाहु, इन्द्र और त्रिशंकु, राजमद ने किसे कलंक नहीं दिया? लक्ष्मण कहते हैं, भरत ने यह उपाय ठीक ही किया कि शत्रु और ऋण को ज़रा भी न रहने दे। पर एक भलाई नहीं की कि राम को असहाय जानकर उनका निरादर किया। आज युद्ध में राम का क्रोधित मुख देखकर यह भली भाँति समझ में आएगा। इतना कहते ही वे नीति का रस भूल जाते हैं, रोमांच के बहाने युद्धरस का वृक्ष फूल उठता है। प्रभु के चरणों की धूल सिर पर रखकर वे अपना सहज बल कहते हैं। नाथ, अनुचित न मानिए, भरत ने हमारा थोड़ा अपकार नहीं किया। कब तक मन मारकर सहें? स्वामी साथ हैं और धनुष हाथ में। क्षत्रिय जाति, रघुकुल में जन्म, राम का भाई। लात मारने पर धूल भी सिर चढ़ती है।

229.1

सहसबाहु सुरनाथ त्रिसंकू । केहि न राजमद दीन्ह कलङ्कू ॥
भरत कीन्ह यह उचित उपाऊ । रिपु रिन रञ्च न राखब काऊ ॥

sahasabāhu suranātha trisaṃkū | kehi na rājamada dīnha kalaṅkū ||
bharata kīnha yaha ucita upāū | ripu rina rañca na rākhaba kāū ||

229.2

एक कीन्हि नहिँ भरत भलाई । निदरे राम जानि असहाई ॥
समुझि परिहि सोउ आजु बिसेखी । समर सरोष राम-मुख पेखी ॥

eka kīnhi nahim̐ bharata bhalāī | nidare rāma jāni asahāī ||
samujhi parihi sou āju bisekhī | samara saroṣa rāma-mukha pekhī ||

229.3

एतना कहत नीति-रस भूला । रन-रस-बिटप पुलक मिस फूला ॥
प्रभु-पद बन्दि सीस रज राखी । बोले सत्य सहज बल भाखी ॥

etanā kahata nīti-rasa bhūlā | rana-rasa-biṭapa pulaka misa phūlā ||
prabhu-pada bandi sīsa raja rākhī | bole satya sahaja bala bhākhī ||

229.4

अनुचित नाथ न मानब मोरा । भरत हमहिॅ उपचार न थोरा ॥
कहँ लगि सहिय रहिय मन मारें । नाथ साथ धनु हाथ हमारें ॥

anucita nātha na mānaba morā | bharata hamahiॅ upacāra na thorā ||
kaham̐ lagi sahiya rahiya mana māreṃ | nātha sātha dhanu hātha hamāreṃ ||

दो॰ 229दोहा

छत्रि-जाति रघुकुल-जनम, राम-अनुज जग जान ।
लातहुँ मारें चढ़ति सिर, नीच को धूरि समान ॥

chatri-jāti raghukula-janama, rāma-anuja jaga jāna |
lātahum̐ māreṃ car̤hati sira, nīca ko dhūri samāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0