बहुरि सोच बस भे सिय-रवनू । कारन कवन भरत आगवनू ॥
एक आइ अस कहा बहोरी । सेन सङ्ग चतुरङ्ग न थोरी ॥
bahuri soca basa bhe siya-ravanū | kārana kavana bharata āgavanū ||
eka āi asa kahā bahorī | sena saṅga caturaṅga na thorī ||
5 श्लोक · 227 में से 326
हर्ष के बाद सोच आता है कि भरत के आने का कारण क्या है। तभी कोई आकर बताता है कि साथ में बड़ी चतुरंगिणी सेना है। राम बहुत सोच में पड़ते हैं। एक ओर पिता का वचन है, दूसरी ओर भाई का संकोच। भरत का स्वभाव मन में विचारकर भी प्रभु का चित्त ठहरने की जगह नहीं पाता। फिर यह जानकर समाधान होता है कि भरत साधु और सयाने हैं, कहे में रहेंगे। लक्ष्मण प्रभु के हृदय की खलबली देखते हैं और समयोचित नीति कहते हैं। स्वामी, बिना पूछे कुछ कहता हूँ, ऐसे समय सेवक का बोलना ढिठाई नहीं। आप सर्वज्ञ हैं, मैं अपनी समझ कहता हूँ। आप सुहृद, सरलचित्त और शील के भंडार हैं, सबको अपने समान मानकर सब पर विश्वास करते हैं।
बहुरि सोच बस भे सिय-रवनू । कारन कवन भरत आगवनू ॥
एक आइ अस कहा बहोरी । सेन सङ्ग चतुरङ्ग न थोरी ॥
bahuri soca basa bhe siya-ravanū | kārana kavana bharata āgavanū ||
eka āi asa kahā bahorī | sena saṅga caturaṅga na thorī ||
सो सुनि रामहि भा अति सोचू । इत पितु बच उत बन्धु सकोचू ॥
भरत सुभाउ समुझि मन माहीॅ । प्रभु-चित हित-थिति पावत नाहीॅ ॥
so suni rāmahi bhā ati socū | ita pitu baca uta bandhu sakocū ||
bharata subhāu samujhi mana māhīॅ | prabhu-cita hita-thiti pāvata nāhīॅ ||
समाधान तब भा यह जाने । भरत कहे महँ साधु सयाने ॥
लखन लखेउ प्रभु हृदयँ खभारू । कहत समय सम नीति-बिचारू ॥
samādhāna taba bhā yaha jāne | bharata kahe maham̐ sādhu sayāne ||
lakhana lakheu prabhu hṛdayam̐ khabhārū | kahata samaya sama nīti-bicārū ||
बिनु पूँछ कछु कहउँ गोसाँई । सेवक समयँ न ढीठ ढिठाई ॥
तुम्ह सर्वज्ञ-सिरोमनि स्वामी । आपनि समुझि कहइ अनुगामी ॥
binu pūm̐cha kachu kahaum̐ gosām̐ī | sevaka samayam̐ na ḍhīṭha ḍhiṭhāī ||
tumha sarvajña-siromani svāmī | āpani samujhi kahai anugāmī ||
नाथ सुहृद सुठि सरल-चित्त, सील-सनेह-निधान ।
सब पर प्रीति प्रतीति जियँ, जानिय आपु समान ॥
nātha suhṛda suṭhi sarala-citta, sīla-saneha-nidhāna |
saba para prīti pratīti jiyam̐, jāniya āpu samāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0