अयोध्याकाण्ड

अध्याय 21: मन्थरा का उपाय और कैकेयी की स्वीकृति

5 श्लोक · 21 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

मन्थरा का उपाय और कैकेयी की स्वीकृति

कैकेयी विलाप करती हैं कि भले जन्म भर नैहर में रहूँ, पर जीते-जी सौत की सेवा नहीं करूँगी, शत्रु के वश में जीने से मरना अच्छा। कुबड़ी ने स्त्रीमाया ठानी। बोली, ऐसा क्यों कहती हो, मानो मान घट गया हो? तुम्हारा सुख और सुहाग दिन-दिन दूना होगा, और जिसने बुरा चाहा वही फल पाएगा। स्वामिनी, जब से यह कुमत सुना है, न दिन में भूख है न रात में नींद। ज्योतिषियों ने रेखा खींचकर कहा है कि भरत ही राजा होंगे। करो तो उपाय बताऊँ, राजा तुम्हारी सेवा के वश हैं। कैकेयी बोलीं, तेरे कहने पर कुएँ में कूद सकती हूँ, पुत्र और पति को भी छोड़ सकती हूँ। मेरा दुःख देखकर तू जो कहेगी, हित के लिए क्यों न करूँगी।

21.1

नैहर जनम भरब बरु जाई । जियत न करवि सवति सेवकाई ॥
अरि बस दैव जिआवत जाही । मरन नीक तेहि जीवन चाही ॥

naihara janama bharaba baru jāī | jiyata na karavi savati sevakāī ||
ari basa daiva jiāvata jāhī | marana nīka tehi jīvana cāhī ||

21.2

दीन बचन कह बहु बिधि रानी । सुनि कुबरीं तिय-माया ठानी ॥
अस कस कहहु मानि सन ऊना । सुख सोहाग तुम्ह कहँ दिन दूना ॥

dīna bacana kaha bahu bidhi rānī | suni kubarīṃ tiya-māyā ṭhānī ||
asa kasa kahahu māni sana ūnā | sukha sohāga tumha kaham̐ dina dūnā ||

21.3

जेहिं राउर अति अनभल ताका । सोइ पाइहि यह फल परिपाका ॥
जब तेँ कुमत सुना मैं स्वामिनि । भूख न बासर नींद न जामिनि ॥

jehiṃ rāura ati anabhala tākā | soi pāihi yaha phala paripākā ||
jaba tem̐ kumata sunā maiṃ svāmini | bhūkha na bāsara nīṃda na jāmini ||

21.4

पूँछेउ गुनिन्ह रेख तिन्ह खाँची । भरत भुआल होहिं यह साँची ॥
भामिनि करहु त कहउँ उपाऊ । हैं तुम्हरीं सेवा बस राऊ ॥

pūm̐cheu guninha rekha tinha khām̐cī | bharata bhuāla hohiṃ yaha sām̐cī ||
bhāmini karahu ta kahaum̐ upāū | haiṃ tumharīṃ sevā basa rāū ||

दो॰ 21दोहा

परउँ कूप तब बचन पर, सकउँ पूत पति त्यागि ।
कहसि मोर दुख देखि बड़, कस न करब हित लागि ॥

paraum̐ kūpa taba bacana para, sakaum̐ pūta pati tyāgi |
kahasi mora dukha dekhi bar̤a, kasa na karaba hita lāgi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0