अयोध्याकाण्ड

अध्याय 217: इन्द्र को भाइयों के मिलन का भय

5 श्लोक · 217 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

इन्द्र को भाइयों के मिलन का भय

मार्ग के जड़ चेतन जितने जीव थे, जिन्होंने प्रभु को देखा या जिन्हें प्रभु ने देखा, वे सब परम पद के योग्य हो गए, और अब भरत के दर्शन ने उनका भवरोग मिटा दिया। भरत के लिए यह बड़ी बात नहीं, जिन्हें राम मन में स्मरण करते हैं। भरत तो राम के प्रिय और छोटे भाई हैं, उनका मार्ग मंगलदायक क्यों न हो? भरत का प्रभाव देखकर इन्द्र को सोच होता है, जगत भलों के लिए भला और नीचों के लिए नीच है। वे गुरु बृहस्पति से कहते हैं, प्रभु, ऐसा कीजिए कि राम और भरत की भेंट न हो। राम संकोची और प्रेम के वश हैं, भरत प्रेम के समुद्र हैं। बनी बात बिगड़ना चाहती है, कोई छल खोजकर यत्न कीजिए।

217.1

जड़ चेतन, मग जीव घनेरे । जे चितये प्रभु जिन्ह प्रभु हेरे ॥
ते सब भए परम-पद-जोगू । भरत-दरस मेटा भव रोगू ॥

jar̤a cetana, maga jīva ghanere | je citaye prabhu jinha prabhu here ||
te saba bhae parama-pada-jogū | bharata-darasa meṭā bhava rogū ||

217.2

यह बडि बात भरत कइ नाहीँ । सुमिरत जिनहि राम मन माहीॅ ॥
बारक राम कहत जग जेऊ । होत तरन तारन नर तेऊ ॥

yaha baḍi bāta bharata kai nāhīm̐ | sumirata jinahi rāma mana māhīॅ ||
bāraka rāma kahata jaga jeū | hota tarana tārana nara teū ||

217.3

भरत राम प्रिय पुनि लघु भ्राता । कस न होइ मग मङ्गल-दाता ॥
सिद्ध साधु मुनिबर अस कहहीॅ । भरतहि निरखि हरष हियँ लहहीॅ ॥

bharata rāma priya puni laghu bhrātā | kasa na hoi maga maṅgala-dātā ||
siddha sādhu munibara asa kahahīॅ | bharatahi nirakhi haraṣa hiyam̐ lahahīॅ ||

217.4

देखि प्रभाव सुरेसहि सोचू । जग भल भलेहि पोच कहँ पोचू ॥
गुरु सन कहेउ करिय प्रभु सोई । रामहि भरतहि भेँट न होई ॥

dekhi prabhāva suresahi socū | jaga bhala bhalehi poca kaham̐ pocū ||
guru sana kaheu kariya prabhu soī | rāmahi bharatahi bhem̐ṭa na hoī ||

दो॰ 217दोहा

राम सँकोची प्रेम-बस, भरत सपेम पयोधि ।
बनी बात बेगरन चहति, करिय जतनु छल-सोधि ॥

rāma sam̐kocī prema-basa, bharata sapema payodhi |
banī bāta begarana cahati, kariya jatanu chala-sodhi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0