अयोध्याकाण्ड

अध्याय 212: इस रोग की दवा राम का लौटना

5 श्लोक · 212 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

इस रोग की दवा राम का लौटना

भरत कहते हैं, यह दुःख दिन रात छाती जलाता है, न दिन को भूख है न रात को नींद। माता की कुमति पाप की जड़ बढ़ई है, उसने हमारे हित को बसूला बनाया। कलियुग की बुरी लकड़ी से बुरा यंत्र बनाकर कठिन कुमंत्र पढ़कर अवध में गाड़ दिया। मेरे लिए उसने यह कुठाट रचा और सारे जगत को तितर बितर कर दिया। यह कुयोग तभी मिटेगा जब राम लौटकर अवध में बसें, और कोई उपाय नहीं। मुनि कहते हैं, तात, विशेष सोच मत करो, राम के चरण देखते ही सब दुःख मिट जाएगा। फिर समझाकर कहते हैं, आज प्रेम के प्यारे अतिथि बनो, हम जो कन्द, मूल, फल, फूल दें, कृपा करके लो।

212.1

एहि दुख दाहँ दहइ दिन छाती । भूख न बासर नीद न राती ॥
एहि कुरोग कर औषध नाहीॅ । सोधेउँ सकल विस्व मन माहीॅ ॥

ehi dukha dāham̐ dahai dina chātī | bhūkha na bāsara nīda na rātī ||
ehi kuroga kara auṣadha nāhīॅ | sodheum̐ sakala visva mana māhīॅ ||

212.2

मातु कुमत बढ़ई अघ-मूला । तेहिं हमार हित कीन्ह बँसूला ॥
कलि-कुकाठ कर कीन्ह कुजन्त्रू । गाडि अवध पढ़ि कठिन कुमंत्रु ॥

mātu kumata bar̤haī agha-mūlā | tehiṃ hamāra hita kīnha bam̐sūlā ||
kali-kukāṭha kara kīnha kujantrū | gāḍi avadha par̤hi kaṭhina kumaṃtru ||

212.3

मोहि लगि यह कुठाट तेहिं ठाटा । घालेसि सब जग बारहबाटा ॥
मिटइ कुजोग राम फिरि आये । बसइ अवध नहिँ आन उपाये ॥

mohi lagi yaha kuṭhāṭa tehiṃ ṭhāṭā | ghālesi saba jaga bārahabāṭā ||
miṭai kujoga rāma phiri āye | basai avadha nahim̐ āna upāye ||

212.4

भरत बचन सुनि मुनि सुख पाई । सबहिँ कीन्ह बहु भाँति बड़ाई ॥
तात करहु जनि सोच बिसेखी । सब दुख मिटहि राम-पग देखी ॥

bharata bacana suni muni sukha pāī | sabahim̐ kīnha bahu bhām̐ti bar̤āī ||
tāta karahu jani soca bisekhī | saba dukha miṭahi rāma-paga dekhī ||

दो॰ 212दोहा

करि प्रबोध मुनिबर कहेउ, अतिथि पेमप्रिय होहु ।
कन्द मूल फल फूल हम, देहिॅ लेहु करि छोहु ॥

kari prabodha munibara kaheu, atithi pemapriya hohu |
kanda mūla phala phūla hama, dehiॅ lehu kari chohu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0