से तुम्हार धन जीवन प्राना । भूरि-भाग को तुम्हहिँ समाना ॥
यह तुम्हार आचरजु न ताता । दसरथ-सूअन राम-प्रिय-भ्राता ॥
se tumhāra dhana jīvana prānā | bhūri-bhāga ko tumhahim̐ samānā ||
yaha tumhāra ācaraju na tātā | dasaratha-sūana rāma-priya-bhrātā ||
5 श्लोक · 208 में से 326
भरद्वाज कहते हैं, वही प्रेम तुम्हारा धन, जीवन और प्राण है, तुम्हारे समान बड़भागी कौन है? सुनो भरत, रघुवर के मन में तुम्हारे समान प्रेमपात्र कोई नहीं। लक्ष्मण, राम और सीता को तुमसे अत्यन्त प्रीति है, सारी रात तुम्हारी सराहना करते बीती। प्रयाग में नहाते समय मैंने यह मर्म जाना, वे तुम्हारे प्रेम में मग्न हो जाते थे। यह रघुवीर की कोई अधिक बड़ाई नहीं, रघुराई तो शरणागत के कुटुम्ब तक का पालन करते हैं। भरत, मेरा मत यह है कि तुम मानो राम का स्नेह ही देह धरकर आए हो। तुम्हारे लिए जो कलंक है, वह हम सबके लिए उपदेश है। राम भक्ति के रस की सिद्धि के लिए यह समय गणेश के समान मंगलमय आरम्भ है।
से तुम्हार धन जीवन प्राना । भूरि-भाग को तुम्हहिँ समाना ॥
यह तुम्हार आचरजु न ताता । दसरथ-सूअन राम-प्रिय-भ्राता ॥
se tumhāra dhana jīvana prānā | bhūri-bhāga ko tumhahim̐ samānā ||
yaha tumhāra ācaraju na tātā | dasaratha-sūana rāma-priya-bhrātā ||
सुनहु भरत रघुबर मन माहीॅ । पेम पात्रु तुम्ह सम कोउ नाहीॅ ॥
लखन राम सीतहि अति प्रीती । निसि सब तुम्हहिँ सराहत बीती ॥
sunahu bharata raghubara mana māhīॅ | pema pātru tumha sama kou nāhīॅ ||
lakhana rāma sītahi ati prītī | nisi saba tumhahim̐ sarāhata bītī ||
जाना मरम नहात प्रयागा । मगन होहिॅ तुम्हरें अनुरागा ॥
तुम्ह पर अस सनेह रघुबर कें । सुख जीवन जग जस जड़ नर कें ॥
jānā marama nahāta prayāgā | magana hohiॅ tumhareṃ anurāgā ||
tumha para asa saneha raghubara keṃ | sukha jīvana jaga jasa jar̤a nara keṃ ||
यह न अधिक रघुबीर बड़ाई । प्रनत-कुटुम्ब-पाल रघुराई ॥
तुम्ह तौ भरत भार मत एहू । धरें देह जनु राम-सनेहू ॥
yaha na adhika raghubīra bar̤āī | pranata-kuṭumba-pāla raghurāī ||
tumha tau bharata bhāra mata ehū | dhareṃ deha janu rāma-sanehū ||
तुम्ह कहँ भरत कलङ्क यह, हम सब कहँ उपदेस ।
राम भगति रस सिद्धि-हित, भा यह समउ गनेस ॥
tumha kaham̐ bharata kalaṅka yaha, hama saba kaham̐ upadesa |
rāma bhagati rasa siddhi-hita, bhā yaha samau ganesa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0