जानहु राम कुटिल करि मोही । लोग कहउ गुरु-साहिब-द्रोही ॥
सीता-राम-चरन रति मोरें । अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें ॥
jānahu rāma kuṭila kari mohī | loga kahau guru-sāhiba-drohī ||
sītā-rāma-carana rati moreṃ | anudina bar̤hau anugraha toreṃ ||
5 श्लोक · 205 में से 326
भरत प्रार्थना करते हैं, राम मुझे कुटिल समझें, लोग मुझे गुरुद्रोही और स्वामिद्रोही कहें, पर आपकी कृपा से सीता और राम के चरणों में मेरी प्रीति दिन दिन बढ़े। बादल जन्म भर पपीहे को भुला दे, जल माँगने पर वज्र और पत्थर गिराए, तो भी पपीहे की रटन घटे तो उसकी हानि है, प्रेम बढ़ने में ही सब भलाई है। जैसे तपाने से सोने पर चमक चढ़ती है, वैसे ही प्रियतम के चरणों का नियम निभाने से प्रेम बढ़ता है। भरत के वचन सुनकर त्रिवेणी के बीच से मंगल देने वाली कोमल वाणी होती है, तात भरत, तुम सब प्रकार साधु हो, राम के चरणों में तुम्हारा अनुराग अथाह है। यह सुनकर भरत पुलकित होते हैं और देवता धन्य धन्य कहकर फूल बरसाते हैं।
जानहु राम कुटिल करि मोही । लोग कहउ गुरु-साहिब-द्रोही ॥
सीता-राम-चरन रति मोरें । अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें ॥
jānahu rāma kuṭila kari mohī | loga kahau guru-sāhiba-drohī ||
sītā-rāma-carana rati moreṃ | anudina bar̤hau anugraha toreṃ ||
जलद जनम-भरि सुरति बिसारउ । जाचत जल पबि पाहन डारउ ॥
चातक-रटनि घटें घटि जाई । बढ़े प्रेम सब भाँति भलाई ॥
jalada janama-bhari surati bisārau | jācata jala pabi pāhana ḍārau ||
cātaka-raṭani ghaṭeṃ ghaṭi jāī | bar̤he prema saba bhām̐ti bhalāī ||
कनकहिं बान चढ़इ जिमि दाहें । तिमि प्रियतम-पद नेम निबाहें ॥
भरत बचन सुनि माँझ त्रिबेनी । भइ मृदु-बानि सुमङ्गल देनी ॥
kanakahiṃ bāna car̤hai jimi dāheṃ | timi priyatama-pada nema nibāheṃ ||
bharata bacana suni mām̐jha tribenī | bhai mṛdu-bāni sumaṅgala denī ||
तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू । राम चरन अनुराग अगाधू ॥
बाद गलानि करहु मन माहीॅ । तुम्ह सम रामहि कोउ प्रिय नाहीॅ ॥
tāta bharata tumha saba bidhi sādhū | rāma carana anurāga agādhū ||
bāda galāni karahu mana māhīॅ | tumha sama rāmahi kou priya nāhīॅ ||
तनु पुलकेउ हियँ हरष सुनि, बेनि बचन अनुकूल ।
भरत धन्य कहि धन्य सुर, हरषित बरषहिँ फूल ॥
tanu pulakeu hiyam̐ haraṣa suni, beni bacana anukūla |
bharata dhanya kahi dhanya sura, haraṣita baraṣahim̐ phūla ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0