सृंगबेरपुर भरत दीख जब । भे सनेहँ-बस अङ्ग सिथिल तब ॥
सोहत दिये निषादहि लागू । जनु तनु धरें बिनय अनुरागू ॥
sṛṃgaberapura bharata dīkha jaba | bhe saneham̐-basa aṅga sithila taba ||
sohata diye niṣādahi lāgū | janu tanu dhareṃ binaya anurāgū ||
5 श्लोक · 197 में से 326
शृंगवेरपुर देखते ही भरत के अंग स्नेह से शिथिल हो जाते हैं। इस प्रकार सारी सेना के साथ भरत जगत को पवित्र करने वाली गंगा के तट पर पहुँचते हैं। वे रामघाट को प्रणाम करते हैं और मन ऐसा मग्न हो जाता है मानो राम मिल गए हों। नगर के नर नारी ब्रह्ममय जल देखकर प्रसन्नता से प्रणाम करते हैं, स्नान करके हाथ जोड़कर रामचन्द्र के चरणों में प्रीति माँगते हैं। भरत कहते हैं, हे गंगा, आपकी रेणु सबको सुख देने वाली और सेवकों के लिए कामधेनु है। हाथ जोड़कर यही वर माँगता हूँ, सीता और राम के चरणों में सहज स्नेह। स्नान करके और गुरु की आज्ञा पाकर, माताओं को नहाया जानकर वे सबको डेरे पर ले चलते हैं।
सृंगबेरपुर भरत दीख जब । भे सनेहँ-बस अङ्ग सिथिल तब ॥
सोहत दिये निषादहि लागू । जनु तनु धरें बिनय अनुरागू ॥
sṛṃgaberapura bharata dīkha jaba | bhe saneham̐-basa aṅga sithila taba ||
sohata diye niṣādahi lāgū | janu tanu dhareṃ binaya anurāgū ||
एहि बिधि भरत सेन सब सङ्गा । दीख जाइ जग-पावनि गङ्गा ॥
रामघाट कहँ कीन्ह प्रनामू । भा मन मगन मिले जनु रामू ॥
ehi bidhi bharata sena saba saṅgā | dīkha jāi jaga-pāvani gaṅgā ||
rāmaghāṭa kaham̐ kīnha pranāmū | bhā mana magana mile janu rāmū ||
करहिँ प्रनाम नगर नर-नारी । मुदित ब्रह्म-मय बारि निहारी ॥
करि मज्जनु मागहिं कर जोरी । रामचन्द्र-पद प्रीति न थोरी ॥
karahim̐ pranāma nagara nara-nārī | mudita brahma-maya bāri nihārī ||
kari majjanu māgahiṃ kara jorī | rāmacandra-pada prīti na thorī ||
भरत कहेउ सुरसरि तव रेनू । सकल सुखद सेवक सुरधेनू ॥
जोरि पानि बर माँगउँ एहू । सीय राम पद सहज सनेहू ॥
bharata kaheu surasari tava renū | sakala sukhada sevaka suradhenū ||
jori pāni bara mām̐gaum̐ ehū | sīya rāma pada sahaja sanehū ||
एहि बिधि मज्जन भरतु करि, गुरु अनुसासन पाइ ।
मातु नहानीं जानि सब, डेरा चले लवाइ ॥
ehi bidhi majjana bharatu kari, guru anusāsana pāi |
mātu nahānīṃ jāni saba, ḍerā cale lavāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0