अयोध्याकाण्ड

अध्याय 196: शत्रुघ्न और रानियाँ गुह का स्वागत करती हैं

5 श्लोक · 196 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

शत्रुघ्न और रानियाँ गुह का स्वागत करती हैं

गुह कहते हैं, मैं कपटी, कायर, कुबुद्धि और नीच जाति का था, लोक और वेद दोनों से सब प्रकार बाहर। जब से राम ने मुझे अपनाया, तभी से मैं जगत का भूषण हो गया। उनकी प्रीति देखकर और सुन्दर विनय सुनकर शत्रुघ्न भी उनसे मिलते हैं। निषाद अपना नाम कहकर सब रानियों को आदर से प्रणाम करते हैं। उन्हें लक्ष्मण के समान जानकर रानियाँ आशीर्वाद देती हैं, सौ लाख वर्ष सुखी जियो। नगर के नर नारी उन्हें देखकर ऐसे सुखी होते हैं मानो लक्ष्मण को देखा हो। वे कहते हैं, इसने जीवन का लाभ पाया, रामभद्र ने इसे भुजाओं में भरकर भेंटा। स्वामी का संकेत पाकर सेवक घरों, पेड़ों तले, तालाबों, बागों और वनों में डेरे बना देते हैं।

196.1

कपटी कायर कुमति कुजाती । लोक बेद बाहेर सब भाँती ॥
राम कीन्ह आपन जबही तेँ । भयउँ भुवन-भूषन तबही तेँ ॥

kapaṭī kāyara kumati kujātī | loka beda bāhera saba bhām̐tī ||
rāma kīnha āpana jabahī tem̐ | bhayaum̐ bhuvana-bhūṣana tabahī tem̐ ||

196.2

देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई । मिलेउ बहोरि लखन लघु भाई ॥
कहि निषाद निज नाम सुबानीं । सादर सकल जोहारीं रानीं ॥

dekhi prīti suni binaya suhāī | mileu bahori lakhana laghu bhāī ||
kahi niṣāda nija nāma subānīṃ | sādara sakala johārīṃ rānīṃ ||

196.3

जानि लखन सम देहिॅ असीसा । जिअहु सुखी सय लाख बरीसा ॥
निरखि निषाद नगर-नर-नारी । भये सुखी जनु लखन निहारी ॥

jāni lakhana sama dehiॅ asīsā | jiahu sukhī saya lākha barīsā ||
nirakhi niṣāda nagara-nara-nārī | bhaye sukhī janu lakhana nihārī ||

196.4

कहहिॅ लहेउ एहिं जीवन-लाहू । भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू ॥
सुनि निषाद निज-भाग बड़ाई । प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई ॥

kahahiॅ laheu ehiṃ jīvana-lāhū | bheṃṭeu rāmabhadra bhari bāhū ||
suni niṣāda nija-bhāga bar̤āī | pramudita mana lai caleu levāī ||

दो॰ 196दोहा

सनकारे सेवक सकल, चले स्वामि रुख पाइ ।
घर तरु-तर सर बाग बन, बास बनाएन्हि जाइ ॥

sanakāre sevaka sakala, cale svāmi rukha pāi |
ghara taru-tara sara bāga bana, bāsa banāenhi jāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0