अयोध्याकाण्ड

अध्याय 194: राम नाम से नीच भी पावन

5 श्लोक · 194 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

राम नाम से नीच भी पावन

भरत अत्यन्त प्रीति से गुह से मिलते हैं, लोग प्रेम की इस रीति पर ललचाते हैं। जो लोक और वेद दोनों में सब प्रकार नीचा माना जाता है, जिसकी छाया छू जाने पर भी जल छिड़का जाता है, उसे राम के छोटे भाई अंक में भरकर मिलते हैं और उनका शरीर पुलक से भर जाता है। जो जँभाई लेते हुए भी राम राम कहते हैं, पापों के समूह उनके सामने नहीं आते। इसे तो श्रीराम ने हृदय से लगाया और कुल सहित जगत को पावन करने वाला बना दिया। कर्मनाशा का जल गंगा में मिल जाए, तो कहिए उसे कौन सिर पर नहीं रखता? श्वपच, शबर, खस, यवन, कोल और किरात भी राम कहते ही परम पावन और जगत में प्रसिद्ध हो जाते हैं।

194.1

भेँटत भरत ताहि अति प्रीती । लोग सिहाहिँ प्रेम के रीती ॥
धन्य धन्य धुनि मङ्गल-मूला । सुर सराहि तेहि बरिसहिँ फूला ॥

bhem̐ṭata bharata tāhi ati prītī | loga sihāhim̐ prema ke rītī ||
dhanya dhanya dhuni maṅgala-mūlā | sura sarāhi tehi barisahim̐ phūlā ||

194.2

लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा । जासु छाँह छुइ लेइअ सीॅचा ॥
तेहि भरि अङ्क राम लघु भ्राता । मिलत पुलक परिपूरित गाता ॥

loka beda saba bhām̐tihiṃ nīcā | jāsu chām̐ha chui leia sīॅcā ||
tehi bhari aṅka rāma laghu bhrātā | milata pulaka paripūrita gātā ||

194.3

राम राम कहि जे जमुहाहीॅ । तिन्हहिँ न पाप-पुञ्ज समुहाहीॅ ॥
यह तो राम लाइ उर लीन्हा । कुल समेत जग पावन कीन्हा ॥

rāma rāma kahi je jamuhāhīॅ | tinhahim̐ na pāpa-puñja samuhāhīॅ ||
yaha to rāma lāi ura līnhā | kula sameta jaga pāvana kīnhā ||

194.4

करमनास जल सुरसरि परई । तेहि को कहहु सीस नहिँ धरई ॥
उलटा नाम जपत जग जाना । बालमीकि भये ब्रह्म समाना ॥

karamanāsa jala surasari paraī | tehi ko kahahu sīsa nahim̐ dharaī ||
ulaṭā nāma japata jaga jānā | bālamīki bhaye brahma samānā ||

दो॰ 194दोहा

स्वपच सबर खस जमन जड़, पावँर कोल किरात ।
राम कहत पावन परम, होत भुवन बिख्यात ॥

svapaca sabara khasa jamana jar̤a, pāvam̐ra kola kirāta |
rāma kahata pāvana parama, hota bhuvana bikhyāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0