अयोध्याकाण्ड

अध्याय 190: राम के काज में मरने का गुह का संकल्प

5 श्लोक · 190 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

राम के काज में मरने का गुह का संकल्प

गुह कहते हैं, सब हथियार सजाकर घाट रोक लो और मरने की पूरी तैयारी करो। मैं भरत से आमने सामने लोहा लूँगा, जीते जी उन्हें गंगा पार नहीं होने दूँगा। युद्ध में मृत्यु, वह भी गंगा के तीर पर, राम के काम के लिए, इस क्षणभंगुर शरीर से। भरत राजा के भाई हैं और मैं नीच सेवक, ऐसी मृत्यु बड़े भाग्य से मिलती है। रघुनाथ के निमित्त प्राण छोड़ूँ तो दोनों हाथों में लड्डू हैं। जिसकी साधु समाज में गिनती नहीं और राम भक्तों में रेखा नहीं, वह जीते जी धरती का भार है, माता के यौवन रूपी वृक्ष के लिए कुल्हाड़ी है। विषाद छोड़कर निषादपति सबका उत्साह बढ़ाते हैं और राम का स्मरण कर तुरंत तरकश, धनुष और कवच माँगते हैं।

190.1

होहु सँजोइल रोकहु घाटा । ठाटहु सकल मरै के ठाटा ॥
सनमुख लोह भरत सन लेऊँ । जियत न, सुरसरि उतरन देऊँ ॥

hohu sam̐joila rokahu ghāṭā | ṭhāṭahu sakala marai ke ṭhāṭā ||
sanamukha loha bharata sana leūm̐ | jiyata na, surasari utarana deūm̐ ||

190.2

समर-मरन पुनि सुरसरि-तीरा । राम-काज छनभङ्ग-सरीरा ॥
भरत भाइ-नप मैं जन नीचू । बड़ें भाग असि पाइअ मीचू ॥

samara-marana puni surasari-tīrā | rāma-kāja chanabhaṅga-sarīrā ||
bharata bhāi-napa maiṃ jana nīcū | bar̤eṃ bhāga asi pāia mīcū ||

190.3

स्वामि काज करिहउँ रन रारी । जस धवलिहउँ भुवन दस चारी ॥
तजउँ प्रान रघुनाथ निहोरें । दुहूँ हाथ मुद, मोदक मोरें ॥

svāmi kāja karihaum̐ rana rārī | jasa dhavalihaum̐ bhuvana dasa cārī ||
tajaum̐ prāna raghunātha nihoreṃ | duhūm̐ hātha muda, modaka moreṃ ||

190.4

साधु समाज न जा कर लेखा । रामभगत महँ जासु न रेखा ॥
जायँ जियत जग सो महि भारू । जननी जौबन बिटप कुठारू ॥

sādhu samāja na jā kara lekhā | rāmabhagata maham̐ jāsu na rekhā ||
jāyam̐ jiyata jaga so mahi bhārū | jananī jaubana biṭapa kuṭhārū ||

दो॰ 190दोहा

बिगत बिषाद निषादपति, सबहि बढ़ाइ उछाह ।
सुमिरि राम मागेउ तुरत, तरकस धनुष सनाह ॥

bigata biṣāda niṣādapati, sabahi bar̤hāi uchāha |
sumiri rāma māgeu turata, tarakasa dhanuṣa sanāha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0