अयोध्याकाण्ड

अध्याय 19: दासता और बन्दीगृह की भविष्यवाणी

5 श्लोक · 19 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

दासता और बन्दीगृह की भविष्यवाणी

होनी के वश कैकेयी के मन में विश्वास आ गया, उन्होंने शपथ दिलाकर फिर पूछा। मन्थरा बोली, अब भी नहीं समझीं? पशु भी अपना हित-अनहित पहचानता है। पंद्रह दिन से तैयारी हो रही है और तुम्हें आज मुझसे खबर मिली। तुम्हारे राज में खाती-पहनती हूँ, सच कहना मेरा दोष नहीं, झूठ कहूँ तो विधाता दण्ड दे। यदि कल श्रीराम का तिलक हुआ तो विधाता ने तुम्हारी विपत्ति का बीज बो दिया। लकीर खींचकर कहती हूँ, तुम दूध की मक्खी हो जाओगी। पुत्र सहित सेवा करोगी तभी घर में रह पाओगी, और कोई उपाय नहीं। जैसे कद्रू ने विनता को दुःख दिया, वैसे कौसल्या तुम्हें देंगी। भरत बन्दीगृह में पड़े रहेंगे और लक्ष्मण श्रीराम के सहायक होंगे।

19.1

भावी बस प्रतीति उर आई । पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई ॥
का पूछहु तुम्ह अबहुँ न जाना । निज हित अनहित पसु पहिचाना ॥

bhāvī basa pratīti ura āī | pūm̐cha rāni puni sapatha devāī ||
kā pūchahu tumha abahum̐ na jānā | nija hita anahita pasu pahicānā ||

19.2

भयउ पाख-दिन सजत समाजू । तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू ॥
खाइअ पहिरिअ राज तुम्हारें । सत्य कहें नहिँ दोष हमारें ॥

bhayau pākha-dina sajata samājū | tumha pāī sudhi mohi sana ājū ||
khāia pahiria rāja tumhāreṃ | satya kaheṃ nahim̐ doṣa hamāreṃ ||

19.3

जौँ असत्य कछु कहब बनाई । तो बिधि देइहि हमहिँ सजाई ॥
रामहिँ तिलक कालि जौं भयऊ । तुम्ह कहँ बिपति-बीज बिधि बयऊ ॥

jaum̐ asatya kachu kahaba banāī | to bidhi deihi hamahim̐ sajāī ||
rāmahim̐ tilaka kāli jauṃ bhayaū | tumha kaham̐ bipati-bīja bidhi bayaū ||

19.4

रेख खँचाइ कहउँ बल भाखी । भामिनि भइहु दूध कै माखी ॥
जौँ सुत सहित करहु सेवकाई । तौ घर रहहु न आन उपाई ॥

rekha kham̐cāi kahaum̐ bala bhākhī | bhāmini bhaihu dūdha kai mākhī ||
jaum̐ suta sahita karahu sevakāī | tau ghara rahahu na āna upāī ||

दो॰ 19दोहा

कद्रूँ बिनतहि दीन्ह दुख, तुम्हहिँ कौसिलाँ देब ।
भरत बन्दिगृह सेइहहिँ, लखन राम के नेब ॥

kadrūm̐ binatahi dīnha dukha, tumhahim̐ kausilām̐ deba |
bharata bandigṛha seihahim̐, lakhana rāma ke neba ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0