कैकइ सुअन जोग जग जोई । चतुर बिरञ्चि दीन्ह मोहि सोई ॥
दसरथ तनय राम लघु भाई । दीन्हि मोहि विधि बादि बड़ाई ॥
kaikai suana joga jaga joī | catura birañci dīnha mohi soī ||
dasaratha tanaya rāma laghu bhāī | dīnhi mohi vidhi bādi bar̤āī ||
5 श्लोक · 181 में से 326
भरत कहते हैं, जगत में कैकेयी के पुत्र के योग्य जो कुछ है, चतुर विधाता ने वही मुझे दिया। दशरथ का पुत्र और राम का छोटा भाई होने की बड़ाई विधाता ने मुझे व्यर्थ दी। आप सब तिलक कराने को कहते हैं, राजा की आज्ञा सबको भली लगती है। मुझे और कुमाता को छोड़कर कौन कहेगा कि भला किया गया? चराचर में मेरे सिवा कौन है जिसे सीता और राम प्राणप्रिय नहीं? यह मेरा बुरा दिन है, किसी का दोष नहीं। आप संशय और प्रेम के वश जो कहते हैं, सब उचित है। राम की माता सरल चित्त हैं और मुझ पर विशेष प्रेम रखती हैं, मेरी दीनता देखकर स्नेहवश कहती हैं।
कैकइ सुअन जोग जग जोई । चतुर बिरञ्चि दीन्ह मोहि सोई ॥
दसरथ तनय राम लघु भाई । दीन्हि मोहि विधि बादि बड़ाई ॥
kaikai suana joga jaga joī | catura birañci dīnha mohi soī ||
dasaratha tanaya rāma laghu bhāī | dīnhi mohi vidhi bādi bar̤āī ||
तुम्ह सब कहहु कढ़ावन टीका । राय-रजायसु सब कहँ नीका ॥
उतर देउँ केहि बिधि केहि केही । कहहु सुखेन जथा रुचि जेही ॥
tumha saba kahahu kar̤hāvana ṭīkā | rāya-rajāyasu saba kaham̐ nīkā ||
utara deum̐ kehi bidhi kehi kehī | kahahu sukhena jathā ruci jehī ||
मोहि कुमातु समेत बिहाई । कहहु कहिहि के कीन्ह भलाई ॥
मो बिनु को सचराचर माहीं । जेहि सिय रामु प्रानप्रिय नाहीँ ॥
mohi kumātu sameta bihāī | kahahu kahihi ke kīnha bhalāī ||
mo binu ko sacarācara māhīṃ | jehi siya rāmu prānapriya nāhīm̐ ||
परम-हानि सब कहँ बड़ लाहू । अदिन मोर नहिं दूषन काहू ॥
संसय-सील प्रेम बस अहहू । सबइ उचित सब जो कछु कहहू ॥
parama-hāni saba kaham̐ bar̤a lāhū | adina mora nahiṃ dūṣana kāhū ||
saṃsaya-sīla prema basa ahahū | sabai ucita saba jo kachu kahahū ||
राम मातु सुठि सरल चित, मो पर प्रेम बिसेखि ।
कहइ सुभाय सनेह बस, मोरि दीनता देखि ॥
rāma mātu suṭhi sarala cita, mo para prema bisekhi |
kahai subhāya saneha basa, mori dīnatā dekhi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0