अयोध्याकाण्ड

अध्याय 175: गुरु और मंत्री भरत से राज करने को कहते

5 श्लोक · 175 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

गुरु और मंत्री भरत से राज करने को कहते

वसिष्ठ कहते हैं, राजा का वचन अवश्य सच करो, प्रजा का पालन करो और शोक छोड़ो। स्वर्ग में राजा को संतोष मिलेगा और तुम्हें पुण्य और यश, कोई दोष नहीं। वेद में प्रसिद्ध है और सबका मत है कि पिता जिसे दे, वही राजतिलक पाता है। राज करो, ग्लानि छोड़ो, मेरे वचन हितकारी जानकर मानो। यह सुनकर राम और सीता सुख पाएँगे, कोई पंडित इसे अनुचित नहीं कहेगा। कौसल्या आदि माताएँ भी प्रजा के सुख से सुखी होंगी। राम तुम्हारा मर्म जानते हैं, वे तुम्हें भला ही मानेंगे। राम के आने पर राज उन्हें सौंपकर प्रेम से सेवा करना। मंत्री हाथ जोड़कर कहते हैं, गुरु की आज्ञा मानिए, रघुनाथ के आने पर जो उचित हो वह कीजिएगा।

175.1

अवसि नरेस बचन फुर करहू । पालहु प्रजा सोकु परिहरहू ॥
सुरपुर नप पाइहि परितोषू । तुम्ह कहँ सुकृत सुजस नहिँ दोषू ॥

avasi naresa bacana phura karahū | pālahu prajā soku pariharahū ||
surapura napa pāihi paritoṣū | tumha kaham̐ sukṛta sujasa nahim̐ doṣū ||

175.2

बेद-बिदित सम्मत सबही का । जेहि पितु देइ सो पावइ टीका ॥
करहु राज परिहरहु गलानी । मानहु मोर बचन हित जानी ॥

beda-bidita sammata sabahī kā | jehi pitu dei so pāvai ṭīkā ||
karahu rāja pariharahu galānī | mānahu mora bacana hita jānī ||

175.3

सुनि सुख लहब राम बैदेहीं । अनुचित कहब न पंडित केहीं ॥
कौसल्यादि सकल महँ तारी । तेउ प्रजा-सुख होहिं सुखारीं ॥

suni sukha lahaba rāma baidehīṃ | anucita kahaba na paṃḍita kehīṃ ||
kausalyādi sakala maham̐ tārī | teu prajā-sukha hohiṃ sukhārīṃ ||

175.4

मरम तुम्हार राम कर जानिहि । सो सब विधि तुम्ह सन भल मानिहि ॥
सौंपेहु राज राम के आये । सेवा करेहु सनेह सुहाये ॥

marama tumhāra rāma kara jānihi | so saba vidhi tumha sana bhala mānihi ||
sauṃpehu rāja rāma ke āye | sevā karehu saneha suhāye ||

दो॰ 175दोहा

कीजिअ गुरु आयसु अवसि, कहहिँ सचिव कर जोरि ।
रघुपति आये उचित जस, तस तब करब बहोरि ॥

kījia guru āyasu avasi, kahahim̐ saciva kara jori |
raghupati āye ucita jasa, tasa taba karaba bahori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0